ख्‍यात कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा के नाम पर क्‍यूआर कोड की हेराफेरी कर धोखाधड़ी, दो आरोपित गिरफ्तार

सीहोर ।   अंतरराष्ट्रीय ख्‍याति प्राप्‍त कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आने पर पांच जनवरी को समिति ने मंडी थाने में दो आरोपितों की नामजद शिकायत की थी, जिसमें आरोपितो के द्वारा पंडित प्रदीप मिश्रा की किताबें और रुद्राक्ष के नाम पर श्रद्धालुओं से धोखाधड़ी कर आनलाइन पैसे वसूले जा रहे थे, शिकायत पर मंडी थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजस्थान से दो आरोपितों को गिरफ्तार किया है, जिनसे पूछताछ की जा रही है। थाना प्रभारी मंडी हरी सिंह परमार ने बताया कि पं. मिश्रा के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आने पर सीहोर के मंडी पुलिस थाने में आरोपित विकास विश्नोई के खिलाफ भादंवि की धारा 420 में प्रकरण दर्ज किया गया था। इसके बाद आरोपी विकास विश्नोई एवं मदनलाल निवासी जालौर, राजस्थान को गिरफ्तार कर लिया गया। यह आरोपित प्रसिद्ध कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा के नाम से फर्जी वेबसाइट और वाट्सएप ग्रुप बनाकर उनके भक्तों से धोखाधड़ी कर रहे थे। पं. मिश्रा द्वारा लिखित किताबें व रूद्राक्ष मंगवाने के नाम पर दो बदमाशों ने उनके भक्तों से 500-500 रुपये मंगवा लिए थे। आरोपितों ने पंडित प्रदीप मिश्रा के क्यूआर कोड की जगह अपना क्यूआर कोड ठगी करने के लिए उपयोग किया था, जिसमें वे लोगों से पैसे डलवा रहे थे। सीहोर पुलिस ने राजस्थान के दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सोमवार को उन्हें मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी सीहोर अर्चना नायडू बोडे के न्यायालय में पेश किया गया। कोर्ट ने दोनों आरोपियों को 19 जनवरी तक के लिए पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपितों के खिलाफ धारा 419, 468, 469, 471 भादंवि एवं धारा 66-सी, 66-डी आई.टी. एक्ट भी जोड़ी गई।

पांच जनवरी को की थी शिकायत

बता दें, श्री विट्ठलेश सेवा समिति के सदस्य समीर शुक्ला ने पुलिस थाना मंडी में पांच जनवरी को शिकायत की थी कि आरोपी विकास विश्नोई निवासी राजीवनगरपुर, जिला-जालौर राजस्थान ने पंडित प्रदीप मिश्रा की फोटो व आस्था लाइव का लोगो लगाकर वेबसाइट एवं वाट्सएप ग्रुप बना रखे हैं। उसमें समिति के क्यूआर कोड के स्थान पर उसने अपना क्यूआर कोड लगा रखा है। उसके माध्यम से वह गुरुजी द्वारा लिखित किताब व रुद्राक्ष मंगाने के लिए 500-500 रुपये भक्तों से एकत्रित कर रहा है। जब यह राशि समिति के बैंक खाते में नहीं आई तब उसके द्वारा व्हाट्सएप ग्रुप पर दिए गए मोबाइल नंबर पर संपर्क किया गया, तब उक्त फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। आरोप है कि फर्जी आइडी के जरिए लाखों रुपये की धोखाधड़ी की गई है।

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