सरकार, RBI, HDFC Bank, शेयर मार्केट… अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से क्यों मचा है कोहराम?

नई दिल्ली: देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर एचडीएफसी बैंक के पार्ट-टाइम चेयरमैन और इंडिपेंडेट डायरेक्टर अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से हड़कंप मचा हुआ है। चक्रवर्ती ने नैतिकता संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए बुधवार को बैंक से इस्तीफा दे दिया। वह पांच साल से बैंक के बोर्ड में थे। उनके इस्तीफे के बाद से बैंक के कामकाज को लेकर निवेशकों के चिंता बढ़ गई और सरकार, आरबीआई और एचडीएफसी बैंक को इस पर सफाई देनी पड़ी। आज बैंक का शेयर कारोबार के दौरान 9% तक गिर गया था। इससे बैंक का मार्केट कैप 1 लाख करोड़ रुपये तक गिर गया था। अंत में यह 5 फीसदी गिरावट के साथ बंद हुआ।

यह पहली बार है जब एचडीएफसी बैंक के किसी अंशकालिक चेयरमैन ने कार्यकाल के बीच में पद छोड़ा है जिससे इसके कामकाज को लेकर चिंताएं उठी हैं। यही कारण है कि सरकार और आरबीआई को सामने आकर सफाई देनी पड़ी। वित्तीय सेवा सचिव एम. नागराजू ने कहा कि एचडीएफसी बैंक मजबूत बुनियाद वाला मजबूत संस्थान है। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘एचडीएफसी बैंक मजबूत बुनियाद वाला मजबूत संस्थान है।’

आरबीआई ने क्या कहा

आरबीआई ने भी कहा कि बैंक के कामकाज के संबंध में कोई बड़ी चिंता की बात नहीं है। आरबीआई ने बयान में कहा, ‘एचडीएफसी बैंक एक घरेलू प्रणालीगत रूप से महत्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है जिसके पास मजबूत वित्तीय स्थिति, पेशेवर तरीके से संचालित निदेशक मंडल और सक्षम प्रबंधन दल है। हमारे समय-समय पर किए गए आकलन के आधार पर, इसके आचरण या कामकाज के संचालन के संबंध में कोई बड़ी चिंता नहीं है।’इस बीच एचडीएफसी बैंक के सीईओ और एमडी शशिधर जगदीशन ने कहा कि अतनु चक्रवर्ती को अपने इस्तीफे के फैसले पर पुनर्विचार करने, नैतिकता से संबंधित चिंताओं पर विस्तार से बताने और इस्तीफे में उपयोग किये गये कुछ शब्दों को वापस लेने के लिए कहा गया था। बैंक के बोर्ड के अधिकतर सदस्यों ने कहा कि वह चक्रवर्ती के इस कदम से हैरान हैं क्योंकि उन्होंने इस्तीफे में जिन चिंताओं का जिक्र किया है, उनके बारे में साफ-साफ कुछ नहीं बताया।

मनाने की कोशिश

जगदीशन ने कहा कि बैंक में समस्या वाली कोई बात नहीं है और मैनेजमेंट ने विश्वास जताया कि समय के साथ बैंक अपनी प्रतिष्ठा को हुए नुकसान की भरपाई कर लेगा। जगदीशन ने कहा, ‘बोर्ड के हर सदस्य ने चक्रवर्ती को अपना इस्तीफा वापस लेने या चिंताओं को विस्तार से समझाने की कोशिश की ताकि उनका समाधान किया जा सके, लेकिन वह नहीं माने।’

जगदीशन ने कहा कि पत्र में इस्तेमाल की गई भाषा को कुछ हद तक बदलने की कोशिश भी की गई थी। उन्होंने संकेत दिया कि इसमें सफलता न मिलने के कारण आरबीआई को जानकारी दी गई और नियामक ने तत्परता दिखाते हुए केकी मिस्त्री को तीन महीने के लिए अंतरिम चेयरमैन नियुक्त करने को मंजूरी दी।

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