सीबीआइ की पूछताछ में जीएसटी अफसरों ने खोले राज, बाबू से लेकर आला अफसर तक बंटती थी रिश्वत की रकम

जबलपुर ।  केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर विभाग (जीएसटी) में सात लाख रुपये की रिश्वत लेते पकड़े गए अफसरों से सीबीआइ की पूछताछ शुरू हो गई। सीबीआइ कोर्ट ने आरोपितों को 20 जून तक की रिमांड में भेजा है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि रिश्वत का पैसा नीचे से उपर तक जाता था। आयुक्त जीएसटी कार्यालय में अहम पद पर बैठे अफसर तक बड़ा हिस्सा पहुंचता था।

पान मसाला कारोबारी ने की जीएसटी अधिकारियों की शिकायत

जिस पान मसाला कारोबारी ने सीबीआइ को जीएसटी अधिकारियों की शिकायत की है उससे 35 लाख रिश्वत के लिए सौदा हुआ था। जिसमें दस लाख सिर्फ बड़े अफसर के पास पहुंचा। इसके अलावा शेष रकम में अधीक्षक और निचले स्तर के कर्मचारियों में बंदरबांट होनी थी। सीबीआइ अधिकारियों को जैसे ही उच्च अफसरों के नाम की जानकारी लगी वे इस मामले में जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। पकड़े गए अफसरों के बयान पर संभव है कि अफसरों से भी पूछताछ की जाएगी।

क्या है मामला

दमोह नोहटा में गोपन तंबाकू प्रोडक्ट प्राइवेट लिमिटेड में विगत 18 मई को जीएसटी ने जांच की। शाम सात बजे यह कार्रवाई हुई और जीएसटी चोरी के मामले में फैक्ट्री को सीज कर दिया गया। छापेमारी जीएसटी प्रिवंटी ब्रांच के अधीक्षक कपिल कांबले समेत 11 अफसरों ने की। बाद में फैक्ट्री के मैनेजर अधिकारियों से मिले और फैक्ट्री सीज रिलीज आर्डर के लिए बातचीत की। कपिल कांबले से इस संबंध में वाट्सअप पर बातचीत मैनेजर भागीरथ और गिरीराज के साथ हुई।

35 लाख रुपये में सौदा तय हुआ

अफसरों ने पहले एक करोड़ रुपये की मांग की बाद में 35 लाख रुपये में सौदा तय हुआ। इस बीच सीबीआइ एसपी रिचपाल सिंह से रिश्वत की शिकायत की गई। एक हफ्ते पहले शिकायतकर्ता ने 25 लाख रुपये नकद जीएसटी आफिस में जाकर दिया गया। अंतिम किश्त के दस लाख रुपये देने के बाद रिलीज आर्डर जारी होना था। अंतिम किश्त का सात लाख रुपये देने फैक्ट्री के मैनेजर भागीरथ और गिरीराज मंगलवार की शाम जीएसटी आफिस पहुंचे।

थैले में रुपये दिया जिसे अफसर गिन ही रहे थे …

उन्होंने थैले में पैसा दिया जिसे अफसर गिन ही रहे थे तभी सीबीआइ की टीम ने छापा मारकर पकड़ा। त्रिलोकचंद सेन मैनेजर ने 12 जून को जबलपुर स्थित सीबीआइ को लिखित शिकायत की। कार्रवाई पर आशंका जताई। इस पर जबलपुर एसपी रिचपाल सिंह ने नागपुर की सीबीआइ टीम से इस मामले में मदद मांगी। छापे के दौरान सीबीआइ टीम के डिप्टी एसपी जेजे दामले, इस्पेक्टर प्रशांत राज, एमके बैजूए यूपी सिंह, जुगल किशोर संदीप सिंह एवं अन्य शामिल रहे।

10 घंटे की जांच में घर में लाखों मिले

जीएसटी के दफ्तर में सीबीआइ टीम को रात तीन बजे तक रही। 10 घंटे की जांच में टीम ने पाया कि कपिल कांबले का पद अधीक्षक का था लेकिन उसका रूतबा काफी था। टीम को कांबले के रांझी स्थित घर से तीन लाख रुपए मिले हैं। इंस्पेक्टर प्रदीप हजारी के घर से 41 लाख उसके आफिस केबिन से 16.88 लाख रुपए बरामद हुए। इंस्पेक्टर विकास गुप्ता के घर से 18.29 लाख उसके आफिस केबिन से 1.50 लाख रुपए मिले हैं। वही इंस्पेक्टर वीरेंद्र जैन के ऑफिस केबिन से 2.60 लाख मिले है। इन अधिकारियों ने अपने घरों में 62.29 लाख जमा कर रखे थे। जबकि ऑफिस में 20.97 लाख रखे थे। सौमेन गोस्वामी सिविल लाइन में प्रदीप हजारी अधारताल विकास गुप्ता गढ़ा और वीरेंद्र जैन राईट टाउन में रहते हैं।

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