लोक संस्कृति के संरक्षण व् पर्यटन विकास को बुंदेलखंड के हमीरपुर व् महोबा मे आयोजित होंगे हरदौल उत्सव 

महोबा। बुंदेलखंड मे पर्यटन विकास और बुंदेली लोक संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए उत्तर प्रदेश का पर्यटन विभाग हमीरपुर व् महोबा जिलों मे हरदौल उत्सव आयोजित करेगा. इसके तहत दोनों जनपदो के प्रत्येक गाँव मे बुंदेली कला एवं संस्कृति से सराबोर लोक रंजन के विविध कार्यक्रम आयोजित किये जाएंगे.
जिला पर्यटन अधिकारी डा0 चित्रगुप्त श्रीवास्तव ने बताया की बुंदेलखंड के लोक जीवन मे हरदौल को कुलदेवता के रूप मे प्रतिस्थापित किया गया है.उनकी सम्पूर्ण विंध्य अंचल मे विशेष धार्मिक व् सामाजिक मान्यता है.उत्तर प्रदेश व् मध्य प्रदेश मे विभाजित बुंदेलखंड के हरेक गाँव मे इस वीर बुन्देले की समाधिया मौजूद है. जिन्हे स्थानीय भाषा मे हरदौल जी का चबूतरा कहा जाता है. क्षेत्र मे सभी वर्ग समुदाय के लोगों के सामाजिक उत्सवो के सफलता पूर्ण सम्पादित होने के लिए लाला हरदौल को प्रथम आमंत्रण दिए जाने की पुरातन परम्परा है.आदिकाल से हरदौल चबूतरों से ही यहां के दीवारी, पाई डंडा, राई, आदि विभिन्न बुंदेली लोक नृत्य एवं संगीत के सुर ताल सजने की बात भी कही जाती है.
डा0 चित्रगुप्त ने बताया की शासन की हरदौल उत्सव को बुंदेलखंड मे पर्यटन विकास से जोड़ कर आयोजित किये जाने की योजना है. ताकि देश विदेश के पर्यटको को इसके माध्यम से एक ही जगह पर बुंदेली लोक परम्पराओ, गीत -संगीत, ब्यंजन का रसास्वादन का अवसर प्रदान किया जा सके. यही वजह है की हरदौल उत्सव मे हमीरपुर व् महोबा जिले के प्रत्येक गाँव मे स्थानीय लोक कलाओ एवं संस्कृति से सम्बंधित कार्यक्रमों को आयोजित किया जाएगा. जिनमे क्षेत्रीय लोक कलाक़ारों की ही प्रमुख रूप से हिस्सेदारी होगी.उक्त सभी कार्यक्रम हरदौल चबूतरों पर ही सम्पन्न होंगे. आगामी अक्टूबर व् नवंबर माह मे प्रस्तावित इन कार्यक्रमों का आयोजन पर्यटन विभाग द्वारा संस्कृति विभाग के सहयोग से किया जाएगा.
ज्ञातव्य है की बुंदेलखंड मे हरदौल को लोक देवता का दर्जा प्राप्त है.वह ओरछा नरेश वीर सिंह की आठ संतानो मे सबसे छोटे थे और ओरछा रियासत के उत्तराधिकारी थे. वह अत्यंत बहादुर और ब्राम्हचारी थे.प्रचलित लोक कथा के अनुसार वर्ष 1688 के एक घटनाक्रम मे अवैध सम्बन्धो की झूठी कहानी गढ़कर कुछ लोगों द्वारा बहकाये जाने पर राजा वीरसिंह के सबसे बड़े पुत्र जुझार सिंह ने अपनी पत्नी रानी चम्पावती द्वारा हरदौल को दूध मे विष मिला कर पिलाया गया था.जिसमे उनकी 23 साल की छोटी उम्र मे मृत्यु हो गयी थी.हरदौल की मृत्यु उपरान्त उसकी बहन कुंजा अपनी पुत्री के विवाह पर निमंत्रण देने ओरछा आई तो जुझार सिंह ने उसे दुत्कार कर भगा दिया था. तब कुजा ने हरदौल चबूतरे मे रोते हुये मृत भाई से भांजी की शादी मे शामिल होकर रशमों का निर्वाह करने का आग्रह किया. कहते है की तब हरदौल ने अदृश्य होकर भांजी के विवाह मे शिरकत की और सभी रशमों मे हिस्सा लिया था. 

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