एमपी में यहां नारायण स्वरूप में दो भाइयों के साथ विराजमान हैं भगवान परशुराम, 200 साल पुराना है इतिहास, जानें मान्यता

आज शुक्रवार को देशभर में अक्षय तृतीया मनाई जाएगी. आज ही के दिन भगवान विष्णु के छटे अवतार परशुराम का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है. ब्राह्मण समाज द्वारा परशुराम के मंदिरो में विशेष अनुष्ठान किए जा रहे है. आज हम आपको मध्य प्रदेश के खरगोन जिले में नर्मदा नदी के किनारे स्थित परशुराम के एक ऐसे मंदिर के बारे में बता रहे है जो अति प्राचीन है. खासियत यह है कि यहां परशुराम अपने दो भाईयों और माता रेणुका के साथ विराजमान है. शाम के समय यहां परशुराम का प्रकोत्सव मनाया जाएगा.

शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार निमाड़ और मालवा में ही भगवान परशुराम की जन्मभूमि मानी जाती है. खरगोन के महेश्वर और धार के मानपुर से भगवान परशुराम का गहरा नाता रहा है. मानपुर के जानापाऊ कुटिया में परशुराम की जन्मस्थली है तो वहीं खरगोन में नर्मदा नदी के किनारे कर्मभूमि मानी जाती है. वह एकमात्र ऐसे ऋषि थे, जिन्होंने त्रेतायुग में कई अत्याचारी राजाओं का वध किया था. जिले की पवित्र नगरी महेश्वर (प्राचीन नाम माहिष्मति) के चंद्रवंशी राजा कार्तविर्य सहस्त्रार्जुन वध भी उन्होंने ने ही किया था.

206 साल पुराना है मंदिर
महेश्वर के पेशवा घाट पर नर्मदा नदी के तट पर बना है. यह मंदिर लगभग 206 साल पुराना है. मंदिर के पुजारी ऋषिकुमार जोशी (75 वर्ष) ने लोकल 18 बताया कि उनके पूर्वजों ने यहां परशुराम की मूर्ति स्थापना की थी. पूरा मंदिर पत्थरों से बना है. जिसपर कई तरह की नक्काशियां उकेरी है. कई बाढ़ आई पर मंदिर जस का तस खड़ा है. पहले उनके पिता विष्णुपंत जोशी मंदिर में सेवाएं देते थे. अब उनके बेटे अतुल जोशी यहां पुजारी है. इस मंदिर का वर्णन माहिष्मति स्मारिका एवं नर्मदा रहस्यमई नामक पुस्तकों में भी आता है.

पांच भाईयो में परशुराम सबसे छोटे
पुजारी अतुल जोशी ने बताया कि इस मंदिर में परशुराम नारायण स्वरूप में चतुर्भुज रूप मौजूद है. एक हाथ में शंख, एक में सुदर्शन चक्र, फरसा और धनुष धारण किए हुए है. परशुराम के चार बड़े भाई थे. रुकमावन, सुषेण, वासु, विश्वावसु. परशुराम पांचवी संतान थी. गर्भगृह में उनके साथ दो बड़े भाई और माता रेणुका भी है. शिवजी के बड़े भक्त थे इसलिए सामने शिवलिंग भी स्थापित है.

शाम को मनाएंगे जन्मोत्सव
अक्षय तृतीया के दिन सूर्यास्त के समय परशुराम का जन्म हुआ था. इसलिए शाम के समय जन्मोत्सव मनाया जाएगा. विधि विधान से पूजन के साथ 56 भोग लगाएंगे. समाजजनों द्वारा भवानी माता चौक से शोभायात्रा निकाली जाएगी. मंदिर में महाआरती के साथ महाप्रसादि का वितरण होगा.
 

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