शौक ने ले ली जान! पाकिस्तान में 2 बार की ओलंपिक चैंपियन जर्मन खिलाड़ी की 18700 फीट से दर्दनाक मौत

ग्रेट ट्रांगो टॉवर पर चढ़ चुकी थीं लौरा डाहलमीयर
बता दें कि डाहलमीयर एक अनुभवी पर्वतारोही थीं। वह जून के अंत से उत्तरी पाकिस्तान क्षेत्र में थीं और पहले ही ग्रेट ट्रांगो टॉवर पर चढ़ चुकी थीं। उनके गिरने वाले क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से मौसम काफी खराब चल रहा था, जिसमें बारिश, तेज हवाएं और घने बादल थे। बता दें कि पाकिस्तान के लैला पीक पर पर्वत चढ़ना सबसे मुश्किल माना जाता है। इसके टॉप पर अभी तक सिर्फ सात पर्वतारोहियों ने ही सफलतापूर्वक चढ़ाई की है।

वहीं डाहलमीयर के करियर की बात करें तो उन्होंने अपने दोनों गोल्ड मेडल साउथ कोरिया के प्योंगचांग में 2018 शीतकालीन ओलंपिक में जीते थे। उन्होंने स्प्रिंट और परस्यूट इवेंट में गोल्ड मेडल जीते थे, जबकि उन्होंने व्यक्तिगत स्पर्धा में ब्रॉन्ज मेडल भी जीता था। जर्मन एथलीट ने मई 2019 में संन्यास की घोषणा कर दी थी।
कौन थीं जर्मन एथलीट लौरा डाहलमीयर
लौरा डाहलमीयर का जन्म 22 अगस्त 1993 को हुआ था। वह एक जर्मन बायएथलीट थीं। लौरा डाहलमीयर सबसे सफल बायएथलीट में से एक रही हैं। उन्होंने दो ओलंपिक ओलंपिक गोल्ड मेडल के साथ सात विश्व चैंपियनशिप गोल्ड मेडल भी जीती थीं। लौरा के करियर की शुरुआत साल 2012-13 सीजन में बायएथलॉन विश्व कप से हुई थी। उनके लिए साल 2017 बहुत ही कमाल का रहा था। 2017 में उन्होंने विश्व चैंपियनशिप में पांच गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया था।लौरा ने सिर्फ 25 साल की उम्र में बायएथलॉन से संन्यास ले लिया। संन्यास के बाद वह पर्वतारोहण क्षेत्र में सक्रिय हो गईं और स्की गाइड बन गईं थी।
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