प्राइवेट अस्पतालों में सस्ते इलाज की बंधी आस, सरकार ने बीमा कंपनियों और अस्पतालों से यह कहा है

नई दिल्ली: देश में कम ही लोग हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज अभी काफी कम है। सरकार ज्यादा से ज्यादा लोगों को हेल्थ इंश्योरेंस कवरेज में लाना चाहती है। इसके लिए जरूरी है कि हेल्थ इंश्योरेंस का खर्च कम हो। वित्त मंत्रालय ने बीमा कंपनियों और अस्पतालों से कहा कि वे हेल्थ इंश्योरेंस के खर्च को कम करें। साथ ही, सभी स्टेकहोल्डर्स मिलकर काम करें ताकि पॉलिसीधारकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती और सुलभ हों। इसके लिए पारदर्शिता और कुशलता भी जरूरी है।

वित्त मंत्रालय के एक बयान में कहा कि फाइनेंशियल सर्विस विभाग के सचिव एम. नागराजू ने प्रमुख बीमा कंपनियों, अस्पतालों, जनरल इंश्योरेंस काउंसिल और एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स (इंडिया) के प्रतिनिधियों के साथ एक बैठक की। इस बैठक में मेडिकल महंगाई और बीमा प्रीमियम बढ़ने की समस्या पर चर्चा हुई।

सस्ती और सुलभ सेवा

सचिव ने बीमा कंपनियों और अस्पतालों को कुछ खास उपाय अपनाने की सलाह दी। इनमें इलाज के लिए तय नियम बनाना, अस्पतालों को चुनने के लिए एक जैसे नियम रखना और कैशलेस क्लेम की प्रक्रिया को आसान बनाना शामिल है। इन सब से स्वास्थ्य बीमा का खर्च कम करने में मदद मिलेगी। बयान में यह भी कहा गया कि अस्पतालों और बीमा कंपनियों को मिलकर काम करना चाहिए। इससे पॉलिसीधारकों के लिए स्वास्थ्य सेवाएं सस्ती और आसानी से उपलब्ध हो सकेंगी। साथ ही, इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और कुशलता भी आएगी।

जनवरी में भारतीय बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने एक बड़ा फैसला लिया था। उन्होंने बीमा कंपनियों को 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के पॉलिसीधारकों के लिए प्रीमियम 10% से ज्यादा बढ़ाने से रोक दिया था। ऐसा करने से पहले उन्हें IRDAI से मंजूरी लेनी होगी। IRDAI ने यह नियम इसलिए बनाया क्योंकि उसके संज्ञान में आया था कि कुछ स्वास्थ्य बीमा उत्पादों के प्रीमियम वरिष्ठ नागरिकों के लिए बहुत ज्यादा बढ़ाए जा रहे थे। यह भी पाया गया कि प्रीमियम बढ़ने से सबसे ज्यादा परेशानी इन्हीं लोगों को हो रही थी।
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