लेबनान में कितनी ताकतवर है हिज्बुल्लाह? सरकार से ज्यादा मजबूत पकड़, इजरायल के साथ संघर्ष की पूरी कहानी
बेरूत: इजरायल और लेबनान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। हिज्बुल्लाह और इजरायल डिफेंस फोर्स के बीच लगातार हमले न केवल सीमा को अस्थिर कर रहे है, बल्कि अमेरिका-ईरान के बीच हुए नाजुक युद्धविराम को भी खतरे में डाल रहे है। हालिया हमलों में भारी जनहानि हुई है और कूटनीतिक प्रयास दबाव में है। सवाल यह है कि यह टकराव इतना पुराना क्यों है और अब अचानक इतना गंभीर क्यों हो गया?
यह संघर्ष कितना पुराना है?
इजरायल और लेबनान के बीच संघर्ष 1948 से शुरू माना जाता है, जब लेबनान ने अरब देशों के साथ मिलकर इजरायल के गठन का विरोध किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच कभी औपचारिक शांति समझौता नहीं हुआ। 1975-1990 के लेबनानी गृहयुद्ध के दौरान हालात और बिगड़े, जब इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य हस्तक्षेप किया।
2006 की जंग क्यों जरूरी थी?
2006 में हिज्बुल्लाह और इजरायल डिफेंस फोर्स के बीच बड़ा युद्ध हुआ। हिज्बुल्लाह की ओर से इजरायल पर हमले के बाद इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में सैन्य कार्रवाई शुरू की। यह संघर्ष करीब एक महीने तक चला। हालांकि इजरायल ने भारी सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया, लेकिन हिज्बुल्लाह ने मजबूत प्रतिरोध दिखाया।
2023 के बाद तनाव क्यों बढ़ा?
अक्टूबर 2023 में हमास-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद हिज्बुल्लाह ने इजरायल के खिलाफ हमले शुरू कर दिए। इसका उद्देश्य हमास के समर्थन में दबाव बनाना था। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच लगभग रोजाना मिसाइल और ड्रोन हमले होने लगे। 2024 में संघर्ष और बढ़ गया, जिसमें हजारों लोग मारे गए और लाखों लोग विस्थापित हुए।
2026 में हालात क्यों बिगड़े?
फरवरी 2026 में अमेरिका और ईरान के बीच सीधा सैन्य टकराव शुरू हुआ। इसके तुरंत बाद हिज्बुल्लाह ने इजरायल पर हमले तेज कर दिए। जवाब में इजरायल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक्स और जमीनी अभियान शुरू किए। इन हमलों में भारी जनहानि हुई, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया।
इजरायल ने लेबनान में ग्राउंड ऑपरेशन कब शुरू किया?
इजरायल ने मार्च 2026 के मध्य में लेबनान में सीमित जमीनी अभियान शुरू किया। इजरायल डिफेंस फोर्स के अनुसार, इसका उद्देश्य उत्तरी इजरायल के लिए सुरक्षा क्षेत्र बनाना और हिज्बुल्लाह के खतरों को खत्म करना था। यह अभियान मुख्य रूप से दक्षिणी लेबनान और लितानी नदी क्षेत्र के आसपास केंद्रित रहा।
लेबनान की राजनीति में हिज्बुल्लाह की क्या भूमिका ?
हिज्बुल्लाह 1992 से लेबनान की राजनीति का हिस्सा रहा है और संसद व सरकार में इसकी भागीदारी रही है। यह संगठन सामाजिक सेवाएं, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाएं भी प्रदान करता है, जिससे इसे जनसमर्थन मिला। हालांकि, यह एक समानांतर शक्ति के रूप में भी देखा जाता है, जो सरकारी संस्थाओं को चुनौती देता है। इसके कारण लेबनान की राजनीतिक स्थिरता पर असर पड़ता है।
इजरायल पर हिज्बुल्लाह का रुख क्या है?
हिज्बुल्लाह इजरायल को अपना मुख्य दुश्मन मानता है। यह लगातार उसके खिलाफ हमले करता रहा है। 2009 के अपने घोषणापत्र में भी उसने इजरायल को खत्म करने की बात दोहराई थी। सीमा विवाद, खासकर शेबा फार्म्स क्षेत्र को लेकर भी दोनों के बीच लगातार तनाव बना रहता है।
हिज्बुल्लाह क्या है और क्यों अहम है?
हिज्बुल्लाह एक ईरान समर्थित शिया मुस्लिम संगठन है, जिसकी स्थापना 1982 में इजरायल के लेबनान पर आक्रमण के बाद हुई। इसका उद्देश्य इजरायली कब्जे का विरोध करना और उसे खत्म करना था। समय के साथ यह संगठन सिर्फ एक मिलिटेंट ग्रुप नहीं रहा, बल्कि लेबनान की राजनीति, समाज और सुरक्षा ढांचे में गहराई से शामिल हो गया। आज हिज्बुल्लाह को लेबनान में एक शक्तिशाली राजनीतिक और सैन्य ताकत माना जाता है।
