‘1000 में एक थी मैं, फूट-फूटकर रोती थी, 2003 विश्व कप विनाशकारी अनुभव’ महिला एंकर का यूं छलका दर्द

नई दिल्ली: क्रिकेट होस्ट करना किसी भी एंकर के लिए गौरव की बात होती है। हजारों-लाखों के फैंस के बीच चमक-दमक से हर कोई छा जाना चाहता है। हालांकि, समय-समय पर इस लैविश लाइफ के पीछे की वो सच्चाई सामने आती है, जो कई बार खौफनाक होती है। भारतीय टीवी इंडस्ट्री में बड़ी नाम मंदिरा बेदी ने एक ऐसे ही सच से पर्दा उठाया है। उन्होंने बताया कि किस तरह से उन्हें जब 2003 शुरुआत में परेशानी हुई थी और वह फूट-फूटकर रोती थीं। 1000 लड़कियों का स्क्रीन टेस्ट लिया गया था और वह उनमें से इकलौती चुनी गई थीं।

एक इंटरव्यू में शांति और औरत सहित तमाम टीवी शो में अपने अभिनय का लोहा मनवा चुकी मंदिरा बेदी ने बताया कि क्रिकेट उनके करियर का टर्निंग पॉइंट रहा। उसने उनका करियर बदल दिया। उन्होंने बताया कि टीवी में एक्टिंग करने के बाद वह कुछ ही समय में ऊब गई थीं। यही वजह है कि जब 2003 विश्व कप होस्ट करने का मौका मिला तो उन्होंने तुरंत लपक लिया। वह कुछ अलग करना चाहती थीं। हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि शुरुआती सप्ताह विनाशकारी अनुभव वाले थे।

उन्होंने बताया कि कड़वे अनुभव के बावजूद हार नहीं मानी और कुछ ही समय में वह हर किसी की फेवरिट हो गईं। उन्होंने बताया कि 2003 विश्व कप होस्ट करने का मौका मिलने से पहले ब्रॉडकास्टर्स ने 1000 लड़कियों का स्क्रीन टेस्ट लिया था। फिटनेस फ्रीक मानी जाने वाली मंदिरा पहली महिला क्रिकेट एंकर थीं। उन्होंने कहा- मेरा पहला रिएक्शन हां था, लेकिन इसके बाद बहुत-सी चीजें हुईं। उन लोगों ने 1000 लड़कियों का स्क्रीन टेस्ट लिया था। 3 स्क्रीन टेस्ट के बाद मेरा सिलेक्शन हुआ।
उन्होंने लीजेंड्स के साथ बैठकर शो होस्ट करने का अपना अनुभव बताते हुए कहा- यह मायने नहीं रखता कि आप कितनी तैयारी करके आते हैं। यह विनाशकारी अनुभव था। मेरे दिमाग में काफी कुछ चल रहा था। सोच रही थी कि यह क्रिकेट है। भारत में इसकी भयंकर फैन फॉलोइंग है। लाइव टीवी पर जो कुछ आप बोल देंगी वो वापस नहीं हो सकता। मैं बहुत नर्वस थी। हर शो के बाद सिर झुकाकर रोती थी। मैं सिर्फ शो में दिखावे की हंसी हंस रही थी।

साथ ही उन्होंने बताया कि चैनल की ओर से काफी मदद मिली। चैनल ने कॉन्फिडेंस दिया। चैनल की ओर से कहा कि आप कमेंटेटर नहीं हैं। जाइए और फन करिए। आप जो कुछ पूछना चाहती हैं पूछिए। कुछ भी अलग नहीं है। चैनल से मिले सपोर्ट के बाद मैं लाइव गई। हालांकि, उससे पहले मुझे कहा किया था कि वह कितनी मूर्ख है, वह जो भी बोलती है, उसमें एक भी शब्द समझदारी भरा नहीं है। बाद में यह भी सुना कि उसे पैनल में पाकर कितनी खुशी होती है, वह पैनल को और अधिक मजेदार बना देती है। कुछ हफ्तों के दौरान बहुत से लोगों के विचार बदल गए। बता दें कि 2003 विश्व कप का फाइनल भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेला गया था। भारतीय टीम को दिल तोड़ने वाली हार मिली थी।
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