IDBI बैंक की लग रही बोली, उदय कोटक और प्रेमा वाट्स खरीदने के लिए लगे लाइन में

नई दिल्ली: सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम ( LIC ) आईडीबीआई बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी बेच रहे हैं। प्रेमा वाट्स की फेयरफैक्स फाइनेंशियल और कोटक महिंद्रा बैंक दोनों ही इसमें बड़ी हिस्सेदारी खरीदने के इच्छुक हैं। इन दोनों कंपनियों के बीच इस हिस्सेदारी को खरीदने की होड़ लगी है। शुक्रवार को ये दोनों अपने वित्तीय प्रस्ताव अलग-अलग जमा करने वाले हैं। सरकार और एलआईसी की आईडीबीआई बैंक में कुल मिलाकर 90% से ज्यादा हिस्सेदारी है।

इकनॉमिक टाइम्स ने सूत्रों के जरिए बताया है कि वित्तीय बोलियां मिलने के बाद और उन्हें खोले जाने से पहले, बैंक की न्यूनतम बिक्री कीमत यानी रिजर्व प्राइस तय की जाएगी। यह रिजर्व प्राइस सिर्फ कुछ सरकारी अधिकारियों को ही पता होगा और इसे बोली लगाने वालों को नहीं बताया जाएगा। एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि रिजर्व प्राइस का फैसला बैंक के कारोबार और संपत्ति के मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा, जिसका काम पूरा हो चुका है। सरकार ने आईडीबीआई बैंक की संपत्तियों का मूल्यांकन करने के लिए एक विशेषज्ञ भी नियुक्त किया था। बैंक की कुल संपत्ति में जमीन और इमारत जैसी अचल संपत्तियों का हिस्सा करीब 3% है।

सेबी की रहेगी अहम भूमिका

मामले से जुड़े लोगों ने यह भी बताया कि भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ( SEBI ) के ओपन ऑफर प्राइसिंग मैकेनिज्म को भी रिजर्व प्राइस तय करने के लिए एक मापदंड के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है। आईडीबीआई बैंक के विनिवेश की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी, लेकिन सरकार द्वारा संभावित खरीदारों के लिए रास्ते आसान बनाने के लिए उठाए गए कई कदमों के कारण इसमें देरी हुई।

₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2027 तक विनिवेश और संपत्ति मुद्रीकरण से ₹80,000 करोड़ जुटाने का लक्ष्य रखा है। बजट के बाद एक बातचीत में, निवेश और लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग (DIPAM) के सचिव अरुणिश चावला ने कहा कि आईडीबीआई बैंक के रणनीतिक विनिवेश का काम तीसरे चरण में पहुंच गया है, जिसका मतलब है कि तकनीकी और वित्तीय बोलियां मंगाई जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि इस वित्तीय वर्ष के खत्म होने से पहले, हम इस मामले में और जानकारी दे पाएंगे।

आरबीआई से लेनी होगी मंजूरी

जो कंपनी आईडीबीआई बैंक को खरीदेगी, उसे भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अंतिम मंजूरी लेनी होगी। आरबीआई यह सुनिश्चित करेगा कि खरीदार बैंक नियामक के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानकों को पूरा करता हो। इसके अलावा, भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) सहित अन्य वैधानिक और नियामक प्राधिकरणों से भी मंजूरी लेनी होगी। सफल बोली लगाने वाले को आईडीबीआई बैंक के अल्पसंख्यक शेयरधारकों के लिए ओपन ऑफर भी देना होगा।

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