कुंडली में बृहस्पति कमजोर है, तो इसे मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की विधि-विधान से पूजा करें

इंदौर ।   ज्योतिष शास्त्र में देवगुरु बृहस्पति को सुख का कारक माना जाता है। यदि कुंडली में बृहस्पति मजबूत हो, तो व्यक्ति को जीवन में सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं और विलासिताएं प्राप्त होती हैं। व्यक्ति अपने जीवन में ऊंचे पद पर पहुंचता है। समाज में सम्मान मिलता है। वहीं, कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो, तो व्यक्ति को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

आपको अपने करियर और व्यवसाय में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कुंडली में बृहस्पति कमजोर है, तो इसे मजबूत करने के लिए गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और गुरु बृहस्पति की विधि-विधान से पूजा करें। साथ ही पूजा के दौरान गुरु ग्रह कवच का पाठ भी जरूर करें।

गुरु ग्रह कवच
ॐ सहस्त्रारे महाचक्रे कर्पूरधवले गुरुः ।

पातु मां बटुको देवो भैरवः सर्वकर्मसु ॥

पूर्वस्यामसितांगो मां दिशि रक्षतु सर्वदा ।

आग्नेयां च रुरुः पातु दक्षिणे चण्ड भैरवः ॥

नैॠत्यां क्रोधनः पातु उन्मत्तः पातु पश्चिमे ।

वायव्यां मां कपाली च नित्यं पायात् सुरेश्वरः ॥

भीषणो भैरवः पातु उत्तरास्यां तु सर्वदा ।

संहार भैरवः पायादीशान्यां च महेश्वरः ॥

ऊर्ध्वं पातु विधाता च पाताले नन्दको विभुः ।

सद्योजातस्तु मां पायात् सर्वतो देवसेवितः ॥

रामदेवो वनान्ते च वने घोरस्तथावतु ।

जले तत्पुरुषः पातु स्थले ईशान एव च ॥

डाकिनी पुत्रकः पातु पुत्रान् में सर्वतः प्रभुः ।

हाकिनी पुत्रकः पातु दारास्तु लाकिनी सुतः ॥

पातु शाकिनिका पुत्रः सैन्यं वै कालभैरवः ।

मालिनी पुत्रकः पातु पशूनश्वान् गंजास्तथा ॥

महाकालोऽवतु क्षेत्रं श्रियं मे सर्वतो गिरा ।

वाद्यम् वाद्यप्रियः पातु भैरवो नित्यसम्पदा ॥

गुरु बीज मंत्र
ॐ बृं बृहस्पतये नम:।।

ऊं गुं गुरुवाये नम:।।

पौराणिक मंत्र
ॐ देवानां च ऋषीणां च गुरु कांचन संन्निभम्।

बुद्धिभूतं त्रिलोकेशं तं नमामि बृहस्पतिम्” ।।

गुरु मंत्र
“ॐ ऐं श्रीं बृहस्पतये नम:॥”

“ॐ गुं गुरवे नम:॥”

“ॐ क्लीं बृहस्पतये नम:॥”

“ॐ ह्रीं क्लीं हूं बृहस्पतये नमः

गुरू गायत्री मंत्र
“ॐ अंगिरो जाताय विद्महे वाचस्पतये धीमहि तन्नो गुरु प्रचोदयात्” ।।

गुरू वैदिक मंत्र
ॐ बृहस्पते अति यदर्यो अर्हाद् द्युमद्विभाति क्रतुमज्जनेषु ।

यद्दीदयच्दवस ऋतप्रजात तदस्मासु द्रविणं धेहि चित्रम्।।

तांत्रिक मंत्र

ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः”।

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