रेत खदान का ठेका बीच में छोड़ा तो लगेगी पेनाल्टी:अब रेत खदान सरेंडर करना पड़ेगा महंगा

भोपाल, अब रेत खदानों के ठेके बीच में छोड़ना या नियमों का उल्लंघन करना ठेकेदारों के लिए महंगा साबित होगा। सरकार ने अब उन ठेकेदारों पर लगाम लगाने की कोशिश की है, जो ठेका लेकर बीच में ही काम बंद कर देते हैं। नए नियम के अनुसार, टाइम लिमिट से पहले खदान सरेंडर करने पर ठेकेदार से पेनाल्टी भी वसूली जाएगी।

साथ ही यदि कोई माइन डेव्हलपर-कम-ऑपरेटर अपना ठेका बीच में ही सरेंडर करता है, तो उस खदान की जब दोबारा नीलामी होगी तो उसका आधार मूल्य हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ जाएगा। ठेकेदार ने स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खुदाई की या समय पर पैसा जमा नहीं किया तो भी भारी पेनाल्टी लगेगी। इसके अलावा गंभीर गलती पाए जाने पर ठेकेदार और उसके पार्टनर को 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट भी कर दिया जाएगा।

राज्य सरकार ने रेत खनन, परिवहन और व्यापार नियम 2019 में बदलाव कर दिया है। खनिज विभाग द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, अब रेत खदानों के ठेके बीच में छोड़ना (सरेंडर) या नियमों का उल्लंघन करना ठेकेदारों के लिए महंगा साबित होगा। सरकार ने रेवेन्यू को होने वाले नुकसान और अवैध खनन पर लगाम कसने के लिए इस नियम में बड़े बदलाव किए हैं।

सरकार ने अब उन ठेकेदारों पर लगाम लगाने की कोशिश की है जो ठेका लेकर बीच में ही काम बंद कर देते थे। इससे सरकार को करोड़ों का नुकसान घाटा होता था। मध्य प्रदेश में 2023-24 की रेत नीति के अंतर्गत ठेके 5 साल के लिए दिए जाते हैैं। साथ ही नर्मदा नदी में मशीनों से रेत खनन पर पूरी तरह प्रतिबंध है। नए नियम के अनुसार, टाइम लिमिट से पहले खदान सरेंडर करने पर ठेकेदार से पेनाल्टी भी वसूली जाएगी।

एक साल से पहले खदान सरेंडर करने पर रोक

नए नियमों के मुताबिक, यदि कोई माइन डेव्हलपर-कम-ऑपरेटर अपना ठेका बीच में ही सरेंडर करता है, तो उस खदान की जब दोबारा नीलामी होगी तो उसका आधार मूल्य हर साल 10 फीसदी की दर से बढ़ जाएगा। इसे ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी ने 2023 में 250 रुपए प्रति घनमीटर की दर से ठेका लिया और 2025 में छोड़ा तो नई नीलामी में रेत की शुरुआती कीमत 30 प्रतिशत बढ़कर 325 रुपए प्रति घनमीटर होगी।

इससे सरकार को होने वाले राजस्व नुकसान की भरपाई की जा सकेगी। नए नियम के मुताबिक, अब ठेकेदार मनमर्जी से जब चाहे ठेका नहीं छोड़ सकेंगे। नए नियम में अनुबंध के पहले एक साल तक खदान सरेंडर करने का आवेदन नहीं दिया जा सकेगा और इस अवधि के बाद अगर ठेकेदार खदान को छोड़ना चाहता है तो उसे इसके लिए 3 महीने पहले लिखित सूचना देनी होगी।

नए नियम के अनुसार, अनुबंध खत्म होने की अवधि के 6 माह पहले भी सरेंडर स्वीकार नहीं होगा। सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह किया गया है कि एक बार सरेंडर का आवेदन देने के बाद उसे वापस नहीं लिया जा सकेगा।

अवैध खनन पर 3 साल ब्लैक लिस्ट

सरकार ने साफ कर दिया है कि अगर ठेकेदार ने पर्यावरण नियमों का उल्लंघन किया। स्वीकृत क्षेत्र से बाहर खुदाई की या समय पर पैसा जमा नहीं किया तो भी भारी पेनाल्टी लगेगी। इसके अलावा गंभीर गलती पाए जाने पर ठेकेदार और उसके पार्टनर को 3 साल के लिए ब्लैक लिस्ट कर दिया जाएगा।

वे विभाग की किसी भी नीलामी में हिस्सा नहीं ले सकेंगे। नए नियम के अनुसार, खदान के अपसोट प्राइज को लेकर भी बदलाव किया गया है। अब रेत समूह की नीलामी के लिए प्रारंभिक बेस वेल्यू का निर्धारण खदानों में उपलब्ध कुल रेत की मात्रा के 250 गुना के बराबर होगा। हालांकि सरकार मांग के आधार पर इसमें बदलाव करने का अधिकार अपने पास सुरक्षित रखेगी।

ठेका निरस्त होने पर सिक्योरिटी की रकम होगी राजसात

नए नियम के अनुसार, यदि कोई ठेका निरस्त होता है तो टेकेदार की जमा की गई सुरक्षा राशि (सिक्योरिटी डिपोजिट) को जब्त कर लिया जाएगा और बकाया राशि की वसूली भू-राजस्व की बकाया रकम के तौर पर सख्ती से की जाएगी।

इसके अलावा ठेका हासिल करने वालों को इस नियम में थोड़ी सा राहत मिली है। पहले उसे सात दिनों में सिक्योरिटी डिपोजिट करना होता था लेकिन नए नियम में वह ठोस कारण बताकर 10 दिन का अतिरिक्त समय मांग सकता है। इसके अलावा टेंडर हासिल करने वाले ठेकेदार को बैंक गारंटी की वैधता अवधि देने का समय 180 दिन से बढ़ाकर 240 दिन कर दिया गया है।

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