नगर देवता के नहीं किए दर्शन, तो अधूरा रहता है संगम स्नान, इतिहास है पुराना

हमारे देश में पूजा-पाठ और धार्मिक आस्थाएं प्रबल रही हैं. यहां के कई मंदिर ऐतिहासिक और पौराणिक स्थल के रूप में पहचाने जाते हैं. इन्हीं में एक मंदिर प्रयागराज में है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण सृष्टि निर्माण के समय ही ब्राह्मणी ने कर दिया था. इस विशेष मंदिर का नाम है वेणी माधव.

प्रयागराज संगम तपोभूमि है, यहां पर महर्षि भारद्वाज का आश्रम है. यहीं गंगा, जमुना, सरस्वती के संगम पर ही सृष्टि का निर्माण करने के बाद ब्रह्मा ने भगवान विष्णु को प्रयागराज की रक्षा के लिए स्थापित किया और नाम रखा- वेणी माधव. नगर देवता के रूप में जाना जाने वाला वेणी माधव मंदिर दारागंज में स्थित है. इस मंदिर का दर्शन करते हुए चैतन्य महाप्रभु को भी बनाया गया है.

यह है खास मान्यता
मंदिर के पुजारी आचार्य लक्ष्मीकांत शास्त्री बताते हैं कि गंगा, जमुना, सरस्वती से बने इस पावन संगम पर दर्शन करने करोड़ों श्रद्धालु आते हैं, लेकिन जब तक संगम स्नान के बाद वेणी माधव का दर्शन ना कर लिया जाए, तब तक संगम स्नान पूरा नहीं होता. इसका साक्ष्य रामचरितमानस और पुराणों में मिलता है. इसलिए कुंभ और माघ मेले के समय यहां पर भी प्रशासन की ओर से पूरा इंतजाम किया जाता है. प्रयागराज में 12 माधव मंदिर स्थित हैं. यह सभी भगवान विष्णु को समर्पित हैं, जिनमें से वेणी माधव प्रमुख माना जाता है. भगवान विष्णु के इस मंदिर को नगर देवता इसलिए मानते हैं, क्योंकि प्रयागराज के 12 कोनों पर द्वादश माधव होने के कारण भगवान विष्णु ही शहर की रखवाली का जिम्मा लिए हैं.

यह है मंदिर खुलने का समय
नगर देवता वेणी माधव का मंदिर सुबह 5:00 बजे ही खुल जाता है और दिन में 1:00 बजे तक खुला रहता है, वहीं शाम को 3:00 बजे से लेकर रात्रि 9:00 बजे तक कपाट खुले रहते हैं, लेकिन माघ मेला और कुंभ के समय इस मंदिर का दरवाजा दिनभर खुला रहता है.
 

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