गैस नहीं है तो इंडक्शन चूल्हे पर बनाइए खाना, बिजली की कोई कमी नहीं होगी

नई दिल्ली: ईरान-इजरायल युद्ध (Iran-Israel War) की तपिश इस समय सिर्फ पश्चिम एशिया के देश ही नहीं, बल्कि भारत समेत पूरी दुनिया इससे परेशान है। भारत में देखिए तो हर जगह से एलपीजी सिलेंडरों की कमी की खबर आ रही है। इस बीच लोगों ने बिजली से चलने वाले इंडक्शन चूल्हा खरीदना शुरू कर दिया। कुछ लोगों ने आशंका व्यक्त की है कि इस वजह से बिजली की कमी न हो जाए। लेकिन सरकार का कहना है कि देश में मांग से दुगुनी बिजली बनाने की क्षमता है। हमारे बिजनेस एडिटर शिशिर चौरसिया ने केंद्रीय बिजली तथा आवास एवं शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल से बातचीत की। 

ईराक-इजरायल युद्ध के दौरान देश भर में खाना बनाने के गैस की तंगी महसूस की जा रही है। ऐसे में बिजली की मांग बढ़ गई है। हम सक्षम हैं इसकी आपूर्ति करने में?
इस समय हम इस स्थिति में हैं कि चाहे जितनी भी बिजली की डिमांड हो, हम उसे पूरा करेंगे। देश में इस समय सभी तरह के पावर प्लांट की इंस्टाल्ड कैपेसिटी 5,24,009.01 मेगावाट की है। जबकि बीते 12 मार्च को सुबह 10 बजे भारत में पीक डिमांड 2,36,203 मेगावाट दर्ज की गई थी। मतलब कि हमारे पास डिमांड से दूने से भी ज्यादा की कैपिसिटी है। जितनी बिजली की जरूरत होगी, उतनी बना ली जाएगी। बीते 12 मार्च 2026 को हमने 4676.04 मिलियन यूनिट बिजली पैदा की है, जो कि कुल डिमांड के मुकाबले ज्यादा ही है। इस समय हमारा डिमांड-सप्लाई गैप भी लगभग खत्म हो गया है। साल 2024-15 में यह करीब 5.5 फीसदी था जो कि अब घट कर 0.1 फीसदी रह गया है। वह भी तकनीकी कारणों से। बिजली की कोई कमी नहीं है।

  1. यह तो अभी की बात हुई। जिस तरह से बिजली की डिमांड बढ़ रही है, उस हिसाब से कैपिसिटी में बढ़ोतरी हो रही है?
    हमलोग लगातार अपनी पावर जेनेरेशन कैपिसिटी को बढ़ा रहे हैं। पहले भारत का ध्यान थर्मल पावर पर था तो इसी सेक्टर में नए पावर प्लांट आ रहे थे। अब सरकार का जोर अक्षर ऊर्जा, खास कर सौर ऊर्जा पर है तो इसमें खूब विस्तार हो रहा है। लेकिन इसमें दिक्कत यह है कि धूप दिन के 24 घंटे नहीं मिलती, बस दिन में कुछ ही घंटे तक मिलती है। इसलिए हमें लगता है कि यदि परमाणु बिजली घर लगाया जाए तो इससे हम जब चाहें, तब बिजली बना सकते हैं। बिल्कुल थर्मल की तरह। अभी इसमें करीब 8 गीगावाट की क्षमता है और 12 गीगावाट की क्षमता की परियोजना पाइपलाइन में है। हमने तय किया है कि साल 2027 तक भारत में परमाणु ऊर्जा की क्षमता 100 गीगावाट की होगी। हम तो सभी राज्यों को प्रोत्साहित कर रहे हैं कि अपने यहां कम से कम एक परमाणु बिजली घर तो जरूर लगाइए।
  2. हमने सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया है। इससे हमें सिंधु, झेलम और चेनाब का भी अतिरिक्त पानी मिल रहा है। क्या इन पानी का उपयोग करने के लिए जम्मू कश्मीर में नए हाइड्रो पावर प्लांट आएंगे?
    हमने इस दिशा में काम शुरू कर दिया है। अभी भी इन नदियों पर कई पावर प्लांट चल रहे हैं। हालांकि उनके रिजर्वेयर में काफी समय से डिसिल्टिंग का काम नहीं हुआ था। रिजर्वेयर में काफी गाद जम जाने से उसकी स्टोरेज कैपिसिटी कम हो गई थी। अब वहां डिसिल्टिंग का काम तो शुरू हो ही गया है, तीन-चार अटके प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो गया है। इसके अलावा भी कुछ पावर प्लांट के प्रोजेक्ट लगाने की योजना है। इस समय उन प्लांटों के लिए साइट को चिन्हित करने का काम चल रहा है। यही नहीं, उन नदियों के पानी को पंजाब की तरफ डायवर्ट करने की भी योजना है। फिर वह पानी राजस्थान, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली तक लाया जाएगा।
  3. इस विकसित देशों का जोर कोयला से चलने वाले पावर प्लांट को बंद करने पर है ताकि कम से कम प्रदूषण हो। भारत की क्या योजना है?
    हमारी भी नीति क्लीन और ग्रीन बिजली की है। लेकिन दिक्कत यह है कि अक्षय ऊर्जा से हम ग्रिड को 24 घंटे सपोर्ट नहीं कर सकते। सौर ऊर्जा दिन के कुछ घंटे ही बन सकते हैं। विंड एनर्जी भी तभी बनेगी जब हवा बहेगी। हां, हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट में आप पीक डिमांड के समय बिजली बना सकते हैं, बांकी समय रोक सकते हैं। इसलिए थर्मल पावर पर निर्भरता तो रहेगी। लेकिन हम नए थर्मल पावर प्लांट की प्लानिंग नहीं कर रहे हैं। जो पहले से प्लान हो गया है, उसे 2032 तक धरातल पर उतार लेंगे। इस समय करीब 20,000 मेगावाट की क्षमता अंडर डेवलपमेंट है। नए थर्मल पावर प्लंट की कोई आवश्यकता नहीं रह जाएगी। वहैसे भी हमने साल 2070 तक नेट जीरो इमिशन का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।
  4. राज्यों में फ्री बिजली देने का चलन बढ़ गया है। उससे डिस्कॉम के हेल्थ पर असर नहीं पड़ेगा?
    इस समय कई राज्यों में किसानों एवं घरेलू उपभोक्ताओं को फ्री में बिजली दी जाती है। कहीं बिजली की दरों को कम रखने के लिए राज्य सरकार की तरफ से सब्सिडी दी जाती है। इससे डिस्कॉम को दिक्कत नहीं है। क्योंकि इसकी भरपायी राज्य सरकार की तरफ से हो जाती है। दिक्कत तब है जबकि राज्य सरकार उपभोक्ताओं से बिजली की दर कम दर चार्ज करने को डिस्कॉम से कहती है। ऐसे में वह जिस दर से बिजली खरीदती है, उससे भी कम दर पर उसे ग्राहकों को देना पड़ता है। इससे डिस्कॉम की हालत खराब होती है। कहीं कहीं तो यह गैप एक रुपया प्रति यूनिट तक है। लेकिन अब धीरे-धीरे इस समस्या को भी खत्म कर रहे हैं। साथ ही डिस्कॉम का AT&C लॉस भी कम हुआ है। 10 साल पहले यह 23 से 24 फीसदी था जो कि अभी घट कर करीब 16 फीसदी रह गया है। तभी तो डिस्कॉम मुनाफे में आए हैं। इनका मुनाफा करीब 27,00 करोड़ रुपये रहा है।
  5. डिस्कॉम के निजीकरण की बात लंबे समय से चल रही है। इस दिशा में अभी तक क्या हुआ है?
    इस दिशा में गुजरात ने काम शुरू कर दिया है। हरियाणा ने भी विकल्पों को तलाशना शुरू कर दिया है। उपभोक्ताओं के हिसाब से देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रइेश में भी डिस्कॉम के प्राइवेटाइजेशन की दिशा में काम शुरू हो गया है। हरियाणा ने प्रस्ताव दिया है कि वहां किसानों को खेती के लिए कनेक्शन देने के लिए अलग से एक कंपनी का गठन हो। उनके लिए फीडर भी अलग हो।
  6. कई राज्यों में डिस्कॉम निजीकरण का विरोध हो रहा है, इससे कैसे निपटेंगे?
    हमें भी खबर मिली है कि कुछ राज्यों में निजीकरण का विरोध हो रहा है। लेकिन विरोध करने वालों में अधिकतर डिस्कॉम के कर्मचारी शामिल हैं। आपको तो पता ही होगा कि बिजली विभाग के कर्मचारी क्या-क्या गुल खिलाते हैं। निजीकरण के बाद उन सब कारगुजारियों पर रोक लग जाएगी। कई किसान संगठनों ने भी कम जगह पर इस मसले पर धरना दिया है। हम उन्हें समझाना चाहते हैं कि उन्हें सिचाई के लिए समय पर क्वालिटी पावर मिलेगा। बिजली सरकारी कंपनी से आ रही है या निजी कंपनी से, यह मायने नहीं रखता। मायने यह रखता है कि समय पर और क्वालिटी पावर मिले।
  7. स्मार्ट मीटर लगाने का काम बड़े जोर-शोर से शुरू हुआ था। कब तक सभी घरों में लग जाएंगे ऐसे मीटर?
    स्मार्ट मीटर बहुत अच्छी चीज है। इससे डिस्कॉम को तो आसानी होती ही है, कंज्यूमर्स को भी आसानी होती है। उसे पता चलता है कि कौन सा अप्लायेंस बिजली पी रहा है और कौन सा अप्लायेंस कम बिजली खपत करता है। उन्हें खपत पर कंट्रोल करने में मदद मिलती है। साथ ही बिजली वितरण कंपनियों को इससे एक महीना एडवांस में पैसा मिल जाता है। शत प्रतिशत प्रीपेड स्मार्ट मीटर लग जाने से डिस्कॉम के पास करीब एक लाख करोड़ रुपये एडवांस में आ जाएंगे। इससे उनकी लिक्विडिटी बढ़ेगी। लोन लेने की जरूरत काफी कम हो जाएगी। इससे ग्राहकों को सस्ती बिजली मिल सकेगी। इस समय तो कई राज्यों में प्रीपेड कंज्यूमर्स को कुछ इंसेंटिव भी मिल रहा है। लेकिन कहीं कहीं, खास कर ग्रामीण क्षेत्रों में इसका विरोध भी हो रहा है।
  8. इसी महीने आप भारत इलेक्ट्रिसिटी समिट 2026 का आयोजन कर रहे हैं। इसके बारे में कुछ बताइए?
    हमारी पावर मिनिस्ट्री आगामी 19 से 22 मार्च के बीच दिल्ली के यशोभूमि में Bharat Electricity Summit (BES) 2026 का आयोजन कर रही है। इसमें आप भारत में इलेक्ट्रिसिटी सिस्टम, इंडस्ट्री की टेक्नोलॉजी, फाइनेंस के स्रोत और अन्य चीजों को एक जगह पर देख पाएंगे। इस कार्यक्रम में 30 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं। अपने यहां की बात करें तो इसमें कम से कम 10 केंद्रीय मंत्रियों की भागीदारी होगी। कई राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की भी इसमें भागीदारी होगी। यही नहीं, बिजली क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के 100 से भी ज्यादा सीईओ और वरिष्ठ अधिकारी भी इसमें शामिल होंगे।
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