बैंक की नौकरी चाहिए तो संभलकर खर्च करें, खराब सिबिल स्कोर फेर सकता है उम्मीदों पर पानी

नई दिल्ली: अगर आप सरकारी बैंक में नौकरी करने का सपना देख रहे हैं, तो अब केवल परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होगा। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि बैंक अब उम्मीदवारों के सिबिल स्कोर यानी क्रेडिट स्कोर ( Credit Score ) पर पैनी नजर रख रहे हैं। हाल ही में संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 20 उम्मीदवारों की नियुक्ति सिर्फ इसलिए रद्द कर दी गई या उनके ऑफर लेटर वापस ले लिए गए क्योंकि उनका क्रेडिट हिस्ट्री ( Credit History ) खराब थी।राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि बैंक उन कर्मचारियों के बीच जिम्मेदार ऋण व्यवहार (Responsible Credit Behaviour) को बढ़ावा देना चाहते हैं, जिन्हें जनता के पैसे की सुरक्षा की जिम्मेदारी सौंपी जाती है। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह संख्या बैंकिंग परीक्षा लेने वाली एजेंसी आईबीपीएस ( IBPS ) द्वारा चुने गए कुल उम्मीदवारों का महज 0.02% ही है।

क्या हैं मुख्य नियम?

  • बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS) के माध्यम से आवेदन करने वाले उम्मीदवारों को जॉइनिंग के समय एक हेल्दी क्रेडिट हिस्ट्री बनाए रखना अनिवार्य है।
  • न्यूनतम कट-ऑफ स्कोर क्या होगा, यह हर बैंक अपनी नीति के अनुसार तय करता है। आमतौर पर 650 या उससे अधिक के स्कोर को अच्छा माना जाता है।
  • यह नियम उन उम्मीदवारों पर लागू नहीं होता जिनका कोई बैंक खाता नहीं है या जिनका कोई पिछली क्रेडिट हिस्ट्री नहीं है। ऐसे उम्मीदवारों के लिए यह आवेदन की अनिवार्य शर्त नहीं है।

क्यों जरूरी है अच्छा क्रेडिट स्कोर?

बैंकों का मानना है कि जो व्यक्ति अपने निजी वित्तीय मामलों (जैसे लोन की ईएमआई या क्रेडिट कार्ड बिल) में लापरवाह है, उसे जनता की जमा पूंजी संभालना जोखिम भरा हो सकता है। जानकारों के मुताबिक, अब केवल लोन ही नहीं बल्कि समय पर बिजली-पानी जैसे यूटिलिटी बिलों के भुगतान को भी क्रेडिट स्कोर में जोड़ने पर चर्चा चल रही है।

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