सरकारी बंगलों में अवैध कब्जा तो दस गुना लगेगी पेनाल्टी
भोपाल, राजधानी के चार ईमली, 74 बंगले, 45 बंगले, प्रोफेसर कालोनी समेत अन्य स्थानों पर सरकारी बंगलों में रहने वाले पूर्व मंत्रियों, निगम मंडल के पूर्व अध्यक्षों, उपाध्यक्षों, राजनीतिक दलों के साथ उन अधिकारी कर्मचारियों की फजीहत होने वाली है जो पद से हटने, तबादला या रिटायरमेंट होने के बाद भी बंगलों और सरकारी आवासों में जमे हैं। ऐसे लोगों से वसूले जाने वाले किराए की राशि गृह विभाग ने तय कर दी है। सरकार ने शासकीय आवास आवंटन नियमों में संशोधन करते हुए बंगलों, सरकारी आवासों के लिए तय अवधि के बाद खाली नहीं करने पर दस गुना पेनाल्टी वसूलने का आदेश जारी कर दिया है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद तय किराया दरें लागू भी हो गई हैं। इसका असर बीजेपी के उन पूर्व मंत्रियों, निगम मंडल में पदाधिकारी रह चुके नेताओं, शासकीय सेवा से रिटायर होने वाले और भोपाल से बाहर स्थानांतरित होने वाले अधिकारियों कर्मचारियों पर पड़ना तय है। इसके लिए नियम भी तय कर दिए गए हैं कि किस स्थिति में तीन माह तक सामान्य किराया और उसके बाद दंड के रूप में किराया वसूला जाएगा।
राज्य शासन के गृह (सामान्य) विभाग द्वारा नियम-17 में बदलाव करते हुए जो नई व्यवस्था तय की गई है उसके अनुसार अब भोपाल से बाहर तबादला होने पर अधिकारी कर्मचारी अधिकतम 6 माह तक सामान्य किराए पर आवास में रह सकेंगे। इसके बाद उनसे पेनाल्टी किराया वसूला जाएगा और बेदखली की कार्रवाई होगी। इन नियमों में यह भी कहा गया है कि अधिकारी कर्मचारी के रिटायर होने की स्थिति में वह छह महीने तक आवास में रह सकेगा। इसमें पहले 3 माह सामान्य किराया लगेगा जबकि अगले 3 माह बाद 10 गुना पेनाल्टी किराया लगेगा। नियमों में यह भी कहा गया है कि त्यागपत्र देने, सेवा से पृथक होने या अन्य कारणों से आवास रखने की अनुमति अधिकतम 3 माह तक रहेगी और इस अवधि तक सामान्य किराया वसूला जाएगा। इसके बाद नियम अनुसार पेनाल्टी किराया वसूला जाएगा।
पेनाल्टी के रूप में वसूले जाने वाले किराए की दरों में भी बदलाव
- विभाग द्वारा नियम-37 के अंतर्गत अलग अलग कैटेगरी के शासकीय आवासों के लिए वर्तमान और प्रस्तावित पेनाल्टी किराया दरें भी जारी की गई हैं।
- आवास आवंटन नियमों में कहा गया है कि बी टाइप के आवासों के मामले में नियम 17 क के अंतर्गत किराया 3000 रुपए मासिक है। रिटायरमेंट के तीन माह की समय अवधि के बाद अतिरिक्त तीन माह की अवधि के लिए ₹ 3000 किराया ही लगेगा। इसके बाद ₹ 30000 किराया वसूला जाएगा और अनधिकृत आधिपत्य घोषित होने पर दंड स्वरूप मासिक किराया ₹90000 लिया जाएगा।
- इसी तरह सी टाइप के आवासों का किराया ₹2400 तय है जो रिटायरमेंट के बाद तीन माह की अवधि पूरी होने पर 10 गुना यानी 24000 हो जाएगा और जब यह अवैध आधिपत्य की श्रेणी में आएगा तो पेनाल्टी के रूप में मासिक किराया 72000 होगा।
- डी टाइप के आवासों के मामले में किराया 1800 रुपए तय है जो रिटायरमेंट के तीन माह की अवधि के बाद 18000 रुपए होगा और इसके बाद यह अनधिकृत कब्जे के रूप में 54000 रुपए महीने हो जाएगा
- गृह विभाग के निर्देश में यह भी कहा गया है कि ई टाइप की आवास का किराया अभी ₹1500 है जो रिटायरमेंट के तीन माह की अवधि के बाद ₹15000 महीना होगा और पेनाल्टी लगने की स्थिति में 45000 रुपए हो जाएगा।
-
कर्मचारियों के आवासों के लिए ऐसी होगी पेनाल्टी
- एफ टाइप के आवास का किराया अभी ₹ 900 है जो 3 माह के रिटायरमेंट के बाद ₹ 9000 और पेनाल्टी की स्थिति में 27000 रुपए होगा।
- जी टाइप के आवास का किराया अभी ₹600 है जो रिटायरमेंट के 3 माह की अवध के बाद ₹ 6000 और अवैध कब्जा की स्थिति में 18000 रुपए हो जाएगा।
- इसी तरह एच टाइप का आवास अभी ₹ 300 में है जो रिटायरमेंट के तीन माह तक की अवधि पूरी होने के बाद ₹ 3000 और 6 माह पूरे होने पर ₹ 9000 महीने वसूला जाएगा।
- जिन कर्मचारियों को आई टाइप के आवास आवंटित है उन्हें अभी ₹100 किराया देना पड़ता है जो रिटायरमेंट के तीन माह बाद ₹1000 होगा और अवैध कब्जा की स्थिति में ₹3000 हो जाएगा।
- गृह विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अभी आवास की श्रेणी पर सामान्य लाइसेंस शुल्क ₹ 3000 लिया जाता है और अनधिकृत होने पर यह पहले माह में ₹ 90000 होगा। इसके बाद 99 हजार रुपये दूसरे माह में, 1 लाख 8000 रुपए तीसरे माह में, 117000 रुपए चौथे महीने में, 126000 रुपए पांचवें माह में और 133000 छठे माह में होगा। इसी तरह से हर महीने पेनल्टी राशि बढ़ती जाएगी।
