भारतीय घरों में छिपा है अकूत खजाना, देश की GDP के मुकाबले ज्यादा, बैंकों में भी नहीं है इतना पैसा

नई दिल्ली: अगर आपको लगता है कि देश के बैंकों में सबसे ज्यादा पैसा जमा है तो आप गलत हो सकते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक यह ‘खजाना’ भारतीय घरों में छिपा हुआ है। यह खजाना कुछ और नहीं बल्कि सोना है। कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Kotak Institutional Equities) की एक रिपोर्ट के अनुसार भारतीय घरों के पास मौजूद सोने की कुल कीमत 5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 445 लाख करोड़ रुपये) से अधिक हो गई है।

भारतीय घरों में रखे सोने की वैल्यू का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यह देश की जीडीपी का 125% है। सोने की कीमत में हाल में आई तेजी के कारण भारतीय घरों में रखे गोल्ड को एक नए ऐतिहासिक स्तर पर पहुंचा दिया है।

बीएसई और बैंक डिपॉजिट से भी ज्यादा वैल्यू

  • भारतीय घरों में गोल्ड की जो वैल्यू है, वह भारत के शेयर बाजार (BSE) के कुल मार्केट कैप और कुल बैंक डिपॉजिट से भी ज्यादा है।
  • सोमवार सुबह करीब 11:30 बजे बीएसई पर लिस्ट सभी कंपनियों का मार्केट कैप करीब 420 लाख करोड़ रुपये था, जबकि सोने की कुल वैल्यू करीब 445 लाख करोड़ रुपये है।
  • वहीं रिजर्व बैंक के डेटा के मुताबिक दिसंबर 2025 में बैंकों में जमा कुल रकम की वैल्यू करीब 253 लाख करोड़ रुपये है। इसकी वैल्यू भी सोने की कुल वैल्यू से बहुत कम है।

गैर संपत्ति में सोने की बड़ी हिस्सेदारी

भारतीय परिवारों की कुल गैर-संपत्ति दौलत में अकेले सोने की हिस्सेदारी 65% हो गई है। यह बैंक जमा और इक्विटी (शेयरों) के संयुक्त मूल्य का 175% है।रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2019 में भारतीय परिवारों के पास मौजूद सोने की वैल्यू 109 लाख करोड़ रुपये थी, जो जनवरी 2026 तक बढ़कर 445 लाख करोड़ रुपये हो गई है। यानी महज पांच वर्षों में इसमें चार गुना से अधिक का उछाल आया है।

देश की अर्थव्यवस्था पर असर

इस रिपोर्ट में सोने के प्रति बढ़ते रुझान को लेकर कुछ चिंता भी जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, सोने की भारी खरीद वित्तीय बचत (बैंक डिपॉजिट) का भौतिक संपत्ति में परिवर्तन है। इसे घरेलू पूंजी के निर्यात के समान माना गया है। भारत में सोने की अधिकांश मांग आयात के जरिए पूरी होती है। रिपोर्ट कहती है कि लगातार सोने का आयात करने से आरबीआई के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ता है और इसमें कमी देखी जा सकती है। इससे देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।

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