‘ईरान पर हमला जारी रखो’, ट्रंप पर दबाव बना रहे सऊदी प्रिंस MBS, कहा- जंग रोकना होगी बड़ी गलती

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान एक तरफ युद्ध को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं, वहीं राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ऊपर इसे जारी रखने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यह दबाव खाड़ी में अमेरिका के सबसे प्रमुख सहयोगी सऊदी अरब की तरफ से है। न्यूयॉर्क टाइम्स ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया है कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ईरान के खिलाफ के युद्ध जारी रखने के लिए राष्ट्रपति ट्रंप पर दबाव डाल रहे हैं। MBS के नाम से मशहूर सऊदी क्राउन प्रिंस ने इसे मध्य पूर्व को फिर से गढ़ने का एक ऐतिहासिक अवसर बताया है।

बातचीत से परिचित लोगों ने न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया कि क्राउन प्रिंस ने ट्रंप को यह संदेश दिया है कि ईरान की कट्टरपंथी सरकार को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। बातचीत की जानकारी रखने वाले लोगों ने बताया कि क्राउन प्रिंस ने ईरान को खाड़ी क्षेत्र के लिए दीर्घकालिक खतरा कहा जिसे केवल वहां की सरकार को हटाकर ही खत्म किया जा सकता है।

MBS ने जंग खत्म करने को बताया गलती

न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप युद्ध खत्म करने के लिए तैयार हैं, लेकिन MBS ने तर्क दिया है कि ऐसा करना एक गलती होगी। इतना ही नहीं, सऊदी क्राउन प्रिंस ने तो तेहरान को कमजोर करने के लिए ईरान के ऊर्जा ढांचे पर हमले करने का जोर दिया है। अमेरिकी अधिकारियों ने NYT को बताया कि क्राउन प्रिंस ने तर्क दिया कि अमेरिका को ईरान में अपनी सेना भेजने पर विचार करना चाहिए, ताकि वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर पर कब्जा किया जा सके और सरकार को सत्ता से हटा जा सके।

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भी ईरान को दीर्घकालिक खतरा मानते रहे हैं, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि सऊदी अरब की चिंता अलग है। सऊदी अरब एक अस्थिर और नाकाम ईरान अपने लिए एक गंभीर खतरा मानता है। हालांकि, वही विश्लेषक कहते हैं कि इजरायली अधिकारी शायद एक असल ईरान को अपनी जीत मानेंगे, जो अपनी आंतरिक उथल-पुथल में इतना उलझा हो कि वह इजरायल के लिए कोई खतरा न बन सके।

सऊदी ने युद्ध पर क्या कहा?

रिपोर्टों के उलट, सऊदी अरब ने सार्वजनिक रूप से युद्ध को आगे बढ़ाने की बात से इनकार किया है। एक आधिकारिक बयान में सऊदी सरकार ने कहा, ‘किंगडम ने हमेशा, यहां तक कि इसके शुरू होने से पहले भी, इस संघर्ष के शांतिपूर्ण समाधान का समर्थन किया है।’

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