मप्र के किसानों से छीनी गई थी जमीन, अब रेलवे में मिलेगी नौकरी, हाईकोर्ट ने सुनाया फैसला

इंदौर: मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में रामगंज मंडी से भोपाल स्टेशन तक रेलवे लाइन से प्रभावित किसानों को हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने रेलवे को प्रभावितों के नौकरी के आवेदनों पर निर्णय लेने के आदेश जारी किए हैं। साथ ही जस्टिस सुबोध अभ्यंकर की कोर्ट ने प्रभावितों के आवेदनों पर सुनवाई नहीं करने पर रेलवे को फटकार भी लगाई है। रामगंज मंडी से भोपाल के बीच रेलवे लाइन के लिए वर्ष 2010 में ग्राम सुल्तानपुर, पोस्ट मोया, तहसील व जिला राजगढ़ (ब्यावरा) की जमीन अधिग्रहित की गई थी। रेलवे ने एक अधिसूचना भी जारी की थी, जिसमें प्रावधान था कि जिस परिवार की जमीन अधिग्रहित की गई है, उसके एक व्यक्ति को नौकरी दी जाएगी। प्रभावितों ने 28 फरवरी 2014 को रेलवे में नौकरी के लिए आवेदन भी किया था। लेकिन इस पर कोई निर्णय नहीं हुआ।

फिर दिया आवेदन

इस बीच 1 मार्च 2017 को जमीन अधिग्रहण के मुआवजे के आदेश के अनुसार उन्होंने इसकी राशि भी ले ली। लेकिन जब नौकरी के आवेदन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो उन्होंने 18 अप्रैल 2023 को दोबारा आवेदन किया। लेकिन रेलवे ने इस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की। इस दौरान रेलवे की ओर से कोर्ट में इसका विरोध किया गया। रेलवे की ओर से दलील दी गई कि यह पहले से तय था कि आवेदन स्वीकार करने के बाद उनकी जांच की जाएगी और पात्र लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी। चूंकि याचिकाकर्ताओं के आवेदन सही नहीं पाए गए, इसलिए उन्हें जानकारी नहीं दी गई। 

पांच याचिकाएं दायर 

इस मामले में कोर्ट में पांच याचिकाएं दायर की गई। इसमें रेलवे बोर्ड के संयुक्त निदेशक (भूमि एवं सुविधा), पश्चिम मध्य रेलवे के महाप्रबंधक, डीआरएम कोटा को भी पक्षकार बनाया गया।

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