टिहरी झील से सटे गांवों में भूस्खलन, चंबा सुरंग के ऊपर और पास के घरों में दरारें बढ़ी 

देहरादून ।  उत्तराखंड के जोशीमठ की तबाही बढ़ने लगा है। कई अन्य जिलों से भी इमारतों में मोटी दरारें पड़ने की खबरें आ रही हैं। टिहरी जिले के चंबा में मकानों और भवनों में दरारें आई हैं। यहां सैकड़ों मकानों की दीवारों में दरारें पड़ चुकी हैं। कुछ जगहों पर जमीन भी धंसने की खबरें है। इससे पहले कर्णप्रयाग में भी मकानों में दरारें आई हैं। भूस्खलन के डर से स्थानीय लोगों ने  सरकार से इस मुद्दे पर संज्ञान लेने और आवश्यक कार्रवाई करने की अपील की है। स्थानीय लोगों ने सूचित किया कि टिहरी झील से सटे गांवों में भूस्खलन हो रहा है और चंबा सुरंग के ऊपर और पास के घरों में दरारें बढ़ गई हैं जिससे आधा दर्जन से अधिक परिवार खतरे में हैं। दरअसल ऑल वेदर प्रोजेक्ट के तहत चंबा में 440 मीटर लंबी सुरंग का निर्माण किया गया है। सुरंग बनने के बाद चंबा के मुख्य बाजार के घरों में दरारें दिखाई देने लगी हैं। इधर जोशीमठ में चल रहे भू-धंसाव के मामले में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपातकालीन कैबिनेट बैठक बुलाई है।  उत्तराखंड सचिवालय में 13 जनवरी को सीएम धामी की अध्यक्षता में आपातकालीन कैबिनेट बैठक होगी। इस बैठक में जोशीमठ आपदा में पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजा राशि और अन्य प्रकार की व्यवस्थाओं को लेकर फैसला होगा। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ रिमोट सेंसिंग के दो साल की एक स्टडी में सामने आया है कि जोशीमठ और इसके आसपास के क्षेत्र में हर साल 2।5 इंच की दर से जमीन धंस रही है। देहरादून स्थित संस्थान द्वारा सैटेलाइट डेटा का इस्तेमाल करते हुए ये स्टडी की गयी है। जुलाई 2020 से मार्च 2022 तक जुटाई गई सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि पूरा क्षेत्र धीरे-धीरे धंस रहा है। धंसने वाला क्षेत्र पूरी घाटी में फैला हुआ है और जोशीमठ तक ही सीमित नहीं है।

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