मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव 2026: कांग्रेस के तीन विधायकों पर संकट, बिगड़ सकता है सीटों का गणित

भोपाल। 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में कांग्रेस के 65 सदस्य हैं। श्योपुर जिले के विजयपुर विधानसभा क्षेत्र से पार्टी के विधायक मुकेश मल्होत्रा की विधायकी पर तलवार लटकी है और उन्हें वोट डालने से रोका गया है। वहीं, सागर जिले की बीना से विधायक निर्मला सप्रे दलबदल के मामले में घिरी हैं। पार्टी उन्हें भाजपा के साथ मानकर चल रही है। इस बीच दतिया जिले के दतिया विधानसभा क्षेत्र से विधायक राजेंद्र भारती को आर्थिक अनियमितता के मामले में तीन वर्ष की सजा सुनाई गई है। हालांकि, अपील करने का अवसर उनके पास है, लेकिन स्थगन नहीं मिलता है या फिर सशर्त दिया जाता है तो कांग्रेस की राज्यसभा चुनाव में चुनौती बढ़ जाएगी।

जून 2026 में रिक्त हो रही हैं तीन सीटें

चुनाव मई में संभव हैं। प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटें जून 2026 में रिक्त हो रही हैं। इनमें से दो सदस्य भाजपा के सुमेर सिंह सोलंकी और जॉर्ज कुरियन हैं और एक कांग्रेस के दिग्विजय सिंह हैं। भाजपा की सदस्य संख्या 164 है, इस प्रकार वह दो सीटें जीतने की स्थिति में है। जबकि, एक सीट कांग्रेस के पक्ष में आएगी, लेकिन जिस तरह हरियाणा में पार्टी के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की और बिहार में अनुपस्थित रहे, उससे मध्य प्रदेश में भी चिंता है। दरअसल, यहां एक विधायक वोट नहीं डाल सकता है तो दूसरे की निष्ठा संदिग्ध है। वहीं, राजेंद्र भारती के मामले में यदि स्थगन नहीं मिलता है या फिर मुकेश मल्होत्रा की तरह सशर्त दिया जाता है तो कुल मिलाकर तीन वोट हाथ से निकल जाएंगे।

एक सीट के लिए 58 प्रथम मत अनिवार्य

इस प्रकार कांग्रेस के पास कुल 62 विधायक रह जाएंगे जो एक सीट पक्की करने के लिए केवल चार अतिरिक्त होंगे। दरअसल, राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 58 सदस्यों का प्रथम मत प्राप्त होना अनिवार्य है, इसलिए विधायकों को साधकर रखना पार्टी के लिए किसी चुनौती से कम नहीं होगा। विपक्षी खेमे में मची इस उथल-पुथल ने आगामी चुनाव के परिणामों को लेकर सस्पेंस बढ़ा दिया है।

विधायकों को तोड़ने और पुराने मामलों के इस्तेमाल की साजिश

उधर, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में मई में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा की मंशा अब खुलकर सामने आ रही है। चुनाव जीतने के लिए कांग्रेस के विधायकों को तोड़ने और खरीदने की कोशिश की जा रही है और जब यह प्रयास सफल नहीं हो रहा, तो उनके विरुद्ध पुराने मामलों को हथियार बनाया जा रहा है। दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती को 25 साल पुराने मामले में सजा सुनाकर दिल्ली में गिरफ्तारी कर ली गई। दूसरी तरफ पूर्व भाजपा विधायक नरोत्तम मिश्रा का पेड न्यूज मामला वर्षों से लंबित होना न्यायिक प्रश्न खड़े करता है।

कई विधायकों के विरुद्ध सक्रिय किए जा रहे मामले

विजयपुर से कांग्रेस विधायक मुकेश मल्होत्रा की सदस्यता समाप्त कर उन्हें राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित कर दिया गया। वहीं, रीवा जिले की सेमरिया विधानसभा से विधायक अभय मिश्रा और भोपाल जिले के भोपाल मध्य विधायक आरिफ मसूद के पुराने मामलों को अचानक सक्रिय किया जाना भाजपा की सत्ता के लिए भूख साफ दिखाता है। यह घटनाएं स्पष्ट संकेत देती हैं कि जो विधायक भाजपा के दबाव में नहीं आ रहे, उन्हें जबरन पुराने या झूठी कार्रवाई के जरिए चुनाव प्रक्रिया से बाहर करने की साजिश रची जा रही है।

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