यूनानी चिकित्सा की हिंदी में भी पढ़ाई करवाने वाला पहला राज्य बनेगा मध्य प्रदेश

भोपाल। मध्य प्रदेश में एलोपैथी के बाद अब यूनानी चिकित्सा पद्धति की उर्दू में होने वाली पढ़ाई भी हिंदी में करने और परीक्षा देने की सुविधा रहेगी। इसके लिए आयुष विभाग ने उर्दू पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद कराया है। यह हाल ही में पूरा हुआ है।स्नातक (बीयूएमएस) प्रथम वर्ष में सात पुस्तकें लगती हैं। इनमें से पांच पुस्तकों का अनुवाद हो गया है। दो पुस्तकें उर्दू और अरबी भाषा की हैं। एनाटमी यानी शरीर रचना विज्ञान और फिजियोलाजी (शरीर क्रिया विज्ञान) की पुस्तकों का अनुवाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने कराया था।

यूनानी चिकित्सा पद्धति का पाठ्यक्रम भी वही है, इसलिए उन्हीं पुस्तकों का यहां उपयोग किया जाएगा। बता दें, एमबीबीएस पाठ्यक्रम की पुस्तकें, पढ़ाई और परीक्षा हिंदी में करवाने की पहल भी मध्य प्रदेश में ही हुई है।

हिंदी में भी प्रश्न पत्र

बड़ी बात है कि भारतीय चिकित्सा पद्धति राष्ट्रीय आयोग (एनसीआईएसएम) भी इसके पक्ष में है। आयोग ने हिंदी में पाठ्यक्रम भी तैयार किया है। पुस्तकों का अनुवाद भी कराने की तैयारी कर रहा है। उधर, मेडिकल यूनिवर्सिटी भी उर्दू और अंग्रेजी के साथ हिंदी में भी प्रश्न पत्र तैयार कर रही है। विश्वविद्यालय के अधिकारियों का कहना है कि हिंदी में लिखने वालों की उत्तर पुस्तिका जांचने की भी पूरी व्यवस्था है।

पुस्तकें उर्दू में ही थीं

बता दें, अभी यूनानी चिकित्सा कॉलेज की कक्षाओं में व्याख्यान हिंदी-उर्दू में होते हैं, लेकिन पुस्तकें उर्दू में ही थीं। आयुष विभाग ने पुस्तकों के अनुवाद के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई थी। तर्क एवं दर्शन शास्त्र, बुनियादी सिद्धांत और चिकित्सा के इतिहास की उर्दू में लिखी पुस्तकों का हिंदी में अनुवाद किया गया है।

जुलाई में सत्र प्रारंभ होने के पहले पुस्तकों का प्रकाशन हो जाएगा। अगले शैक्षणिक सत्र से द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों के लिए भी हिंदी में पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी। बता दें, मध्य प्रदेश में यूनानी चिकित्सा का एक शासकीय और तीन निजी कालेज हैं। देशभर में 57 कॉलेज इस चिकित्सा पद्धति के हैं।

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