राजस्थान में पेयजल संकट से निपटने का ‘मास्टर प्लान’ तैयार, भजनलाल सरकार ने बजट जारी कर छुट्टियां रद्द की

जयपुर: राजस्थान की झुलसाने वाली गर्मी ने अभी दस्तक दी ही है कि राज्य सरकार ने प्यास बुझाने के लिए अपनी ‘फौज’ को मैदान में उतार दिया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ग्रीष्म ऋतु-2026 के दौरान प्रदेशभर में निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए जलदाय विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की छुट्टियां तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दी हैं। अब विभाग का हर सिपाही केवल जनता को पानी पहुंचाने के मिशन पर तैनात रहेगा।

कंट्रोल रूम से होगी सीधी निगरानी

सरकार ने पेयजल संकट की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए राज्य स्तर से लेकर हर जिले में 24×7 कंट्रोल रूम स्थापित कर दिए हैं। मुख्यमंत्री का साफ निर्देश है कि पानी की किल्लत की शिकायत मिलते ही उसका समाधान युद्ध स्तर पर होना चाहिए। इसके लिए फील्ड अधिकारियों की मौके पर उपस्थिति अनिवार्य कर दी गई है। अब केवल अति-आवश्यक परिस्थितियों में ही उच्च स्तर की अनुमति से अवकाश मिल सकेगा।

210 करोड़ का ‘हाइड्रेशन’ बजट

प्रदेश के 41 जिलों में पानी की पाइपलाइन और सप्लाई चैन को मजबूत करने के लिए सरकार ने तिजोरी खोल दी है।

  • शहरी क्षेत्र: ₹55.88 करोड़ की स्वीकृति।
  • ग्रामीण क्षेत्र: ₹154.83 करोड़ का भारी-भरकम बजट।
  • जल परिवहन: 1 अप्रैल से 31 जुलाई तक के लिए ग्रामीण क्षेत्रों को ₹82.37 करोड़ और शहरों को ₹23 करोड़ दिए गए हैं, ताकि सूखाग्रस्त इलाकों में टैंकरों से पानी भेजा जा सके।

श्रमिकों और वाहनों की ‘बटालियन’ तैनात

निगरानी और सुधार कार्यों में देरी न हो, इसके लिए सरकार ने मार्च से जुलाई तक के लिए अतिरिक्त श्रम शक्ति और वाहनों को मंजूरी दी है।

  • 500 श्रमिक और 100 किराए के वाहन।
  • अप्रैल: संख्या बढ़ाकर 2000 श्रमिक और 400 वाहन।
  • मई-जुलाई: चरम गर्मी के दौरान 2500 श्रमिक और 450 वाहन तैनात रहेंगे
  • हर जिले को मिली ‘इमरजेंसी पॉवर’

    आपातकालीन पेयजल कार्यों के लिए सरकार ने विकेंद्रीकरण की नीति अपनाई है। प्रत्येक जिले को 1-1 करोड़ रुपए खर्च करने की सीधी अनुमति दी गई है। कलेक्टर की अनुशंसा पर अतिरिक्त मुख्य अभियंता तत्काल मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था करा सकेंगे। साथ ही, जल जीवन मिशन के तहत बनी नई योजनाओं के संचालन के लिए हर जिले को 25-25 लाख रुपए अलग से दिए गए हैं ताकि ग्रामीण इलाकों में नल से जल की सप्लाई बाधित न हो। भजनलाल सरकार का यह आक्रामक रुख साफ करता है कि इस बार ‘पानी पर राजनीति’ नहीं, बल्कि ‘पानी की आपूर्ति’ प्राथमिकता है।

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