एमबीबीएस की फीस में हुआ इजाफा,अधिकतम फीस 7.99 लाख प्रति वर्ष..

रायपुर। छत्‍तीसगढ़ के निजी मेडिकल कालेजों द्वारा अधिक फीस वसूली को लेकर प्रवेश व फीस विनियामक समिति ने अंतरिक फीस निर्धारित की है। इसके तहत तीन निजी मेडिकल कालेजों के एमबीबीएस व दो निजी मेडिकल कालेजों में संचालित स्नातकोत्तर (पीजी) सीटों के फीस तय कर दिए गए हैं। फीस वर्ष-2022 से 2025 तक के लिए लागू होंगे।अधिकारियों ने बताया कि श्री शंकराचार्य इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस भिलाई, रायपुर इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस भानसोज और श्रीबालाजी इंस्टिट्यूट आफ मेडिकल साइंसेस मोवा के लिए हुए फीस निर्धारण में सबसे कम श्रीबालाजी में 7.55 लाख रुपये प्रति वर्ष फीस तय की गई है। जबकि श्रीशंकराचार्य में एमबीबीएस पाठ्यक्रम के लिए सबसे अधिक 7.88 लाख रुपये प्रति वर्ष देने होंगे। इसके साथ ही श्री शंकराचार्य और (रिम्स) मेडिकल कालेज में स्नातकोत्तर की क्लीनिक सीटों के लिए 9.31 से 9.98 लाख प्रति वर्ष छात्रों को देने होंगे।

वहीं नान क्लीनिकल के लिए प्रति वर्ष 7.45 से लेकर 7.99 लाख रुपये तक फीस तय हुई है। विनियामक समिति ने निजी मेडिकल कालेजों के निरीक्षण, जांच, पड़ोसी राज्यों में प्रचलित फीस की दर और छत्तीसगढ़ की स्थिति प्रति व्यक्ति औसत आय आदि तथ्यों को देखते हुए बैठक कर फीस तय की गई है। इसमें विनियामक समिति के अध्यक्ष, पदेन सदस्य, संचालक चिकित्सा शिक्षा समेत विधिक सलाहकार शामिल हुए।
फीस विनियामक समिति के अधिकारियों ने कहा है कि मेडिकल पाठ्यक्रम के लिए अंतरिम तय फीस में सभी सुविधाएं शामिल हैं।

संस्थानों को निर्देशित किया गया है कि प्रति वर्ष तय किए गए फीस में यूनिफार्म, आइडी कार्ड, लेबोरेटरी, विभिन्ना सांस्कृतिक कार्यक्रम खेलकूद, एनएसएस, भवन, फर्नीचर, उपकरण आदि मदों में कोई अतिरिक्त राशि वसूल नहीं करेंगे। किसी भी तरह की अधिक वसूली हुई तो निजी मेडिकल कालेजों पर कार्रवाई होगी।प्रवेश व फीस विनियामक समिति के अध्यक्ष प्रभात कुमार शास्त्री ने कहा, निजी मेडिकल कालेजों के लिए पाठ्यक्रम आधार पर अंतरिक फीस तय की गई है। इसमें सभी तरह के शुल्क शामिल हैं। यदि इसके बाद भी निजी मेडिकल कालेज अधिक फीस वसूलती है, तो उनपर कार्रवाई की जाएगी।

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