MP में एसआईआर का डर…’कहीं बांग्लादेश न भेज दें’:ऐसे वोटर्स डरें नहीं; मेपिंग के लिए 50 दिन मिलेंगे, दावा-आपत्ति भी कर सकते हैं

मध्यप्रदेश के भोपाल के काजी कैंप में रहने वाली 60 वर्षीय रजिया बेगम इन दिनों स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) प्रक्रिया को लेकर तनाव में हैं। उनके पास साल 1995 में जारी वोटर आईडी कार्ड तो है, लेकिन वर्ष 2003 की वोटर लिस्ट में उनका नाम नहीं मिल रहा। इस वजह से उनका सत्यापन रुक गया है और डर बढ़ता जा रहा है। रजिया को डर है कि कहीं उन्हें बांग्लादेश न भेज दिया जाए।

रजिया की तरह ही कई ऐसे लोग हैं, जिनकी एसआईआर प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हुई है। किसी का दूसरे जिले में नाम था, लेकिन कई साल से भोपाल रहने की वजह से लिस्ट से नाम हट गया तो कई का नाम ही वोटर लिस्ट में नहीं है। ऐसे में तनाव बढ़ना लाजमी है।

इसे लेकर एक्सपर्ट और भोपाल के उप जिला निर्वाचन अधिकारी भुवन गुप्ता से बात की। डर की वजह क्या है? इसे कैसे दूर करें? यदि उनका नाम 2003 की वोटर लिस्ट में नहीं है तो क्या वे आगे की प्रक्रिया नहीं कर पाएंगे…ऐसे ही कुछ सवालों के बारे में उन्होंने समझाया।

सबसे पहले जानिये, क्या है SIR यह भारत चुनाव आयोग की एक प्रक्रिया है। इसमें वोटर लिस्ट अपडेट की जाती है। इसमें 18 साल से ज्यादा के नए वोटर्स को जोड़ा जाता है। ऐसे लोग जिनकी मौत हो चुकी है, जो शिफ्ट हो चुके हैं उनके नाम हटाए जाते हैं। वोटर लिस्ट में नाम, पते में हुई गलतियों को भी ठीक किया जाता है। BLO घर-घर जाकर खुद फॉर्म भरवाते हैं।

मामला-1 : भोपाल के कांजी कैंप की रजिया बेगम एसआईआर सर्वे नहीं होने से बीमार हो गई। 23 नवंबर को उन्हें ब्लड प्रेशर की शिकायत होने के बाद प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीन दिन तक वे आईसीयू में रही। रजिया के बेटे सद्दाम ने बताया उन्होंने हर संभव सूची में नाम खोजा और रोज कलेक्टर कार्यालय जाकर भी जानकारी ली, लेकिन वहां से भी कोई समाधान नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि मां दिनभर इसी तनाव में रहती हैं कि उनका नाम क्यों नहीं है। दैनिक भास्कर से बातचीत में रजिया ने रोते हुए बताया- ‘लोग कहते हैं ‘नाम नहीं होगा तो बांग्लादेश भेज देंगे… हमें बहुत डर लग रहा है… इसी टेंशन में मेरी तबीयत खराब हुई’।

मामला-2 : भोपाल के कोलार की नीलम सिंह भी एसआईआर को लेकर तनाव में है, क्योंकि उनका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है। दो-तीन बार वह बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) से संपर्क भी कर चुकी हैं, लेकिन उन्हें सही जवाब नहीं मिला। ऐसे में उनका डर बढ़ता जा रहा है कि यदि नाम वोटर लिस्ट में नहीं जुड़ा तो एसआईआर नहीं हो पाएगा।

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