‘मेरा बेटा मुंबई में नहीं रह सका’, Arijit Singh के पिता ने जियागंज लौटने की कही कहानी, करते थे कीर्तन

अरिजीत सिंह हाल के दिनों में बॉलीवुड में प्लेबैक सिंगिंग से संन्यास की घोषणा को लेकर काफी चर्चा में रहे। पिछले दिनों आमिर खान अरिजीत सिंह के होमटाउन पहुंचे थे। हाल ही में अरिजीत के पिता सुरिंदर सिंह ने बेटे के बारे में खूब सारी बातें कीं। उन्होंने अरिजीत के बचपन से लेकर अब तक के संगीत के सफर पर भी बातें कीं। उन्होंने म्यूजिक की दुनिया में बेटे की अपार सफलता हासिल करने के बावजूद पश्चिम बंगाल में अपने घर लौटते रहने पर बातें की।

अरिजीत सिंह ने हमेशा अपनी निजी जिंदगी को लो प्रोफाइल रखा है। अरिजीत सिंह के पिता ने जियागंज में स्टार सिंगर की वापसी पर बात की। उन्होंने बताया कि अरिजीत ने गुरुद्वारे में कीर्तन के साथ अपने सिंगिंग की शुरुआत की थी। हाल ही में एक इंटरव्यू में सिंगर के पिता सुरिंदर सिंह ने ये भी बताया कि घर में अरिजीत को प्यार से लोग ‘शोमू’ कहते हैं।

अरिजीत सिंह के पिता ने कहा- हमारा पैतृक घर लाहौर के पास

‘द टेलीग्राफ इंडिया’ के साथ बातचीत के दौरान अरिजीत के पिता ने बेटे की सफलता पर बातें करते हुए इससे बहुत पहले के अपने परिवार के सफर को याद किया। उन्होंने कहा, ‘हमारा पैतृक घर लाहौर के पास था। बंटवारे के बाद, मेरे पिता और उनके तीन भाई लालगोला चले गए।’

यहीं से अरिजीत का भी सफर शुरू हुआ

बंटवारे के बाद, सिंह परिवार को भी सब कुछ छोड़कर जियागंज जाना पड़ा और यहीं से अरिजीत का भी सफर शुरू हुआ। वे अपनी दिवंगत मां अदिति सिंह के साथ खास मौकों पर वहां लोकल गुरुद्वारे में जाकर गाना गाते थे। उन्होंने कहा, ‘मजा आता है। मुझे हंसी आती है। लोग मुझसे पूछते हैं- आपका बेटा क्या कर रहा है, उसका अगला प्रोजेक्ट क्या है।’

बेटे अरिजीत के लिए हर दिन गर्व महसूस करते हैं पिता

एक पिता के तौर पर अपने बेटे के लिए वो हर दिन गर्व महसूस करते हैं। ‘द टेलीग्राफ इंडिया’ के रिपोर्टर अरिजीत सिंह के घर के पास स्थित एक चाय की दुकान पर भी गए, जो कुछ समय पहले तक उनकी शाम की पसंदीदा जगह हुआ करती थी। इस रिपोर्ट में दुकान चलाने वाले हरिदासी दास और उनके बेटे की भी बातें बताई गई हैं।

अरिजीत के पापा बोले- मेरा बेटा भी मुंबई में नहीं रह सका

दुकान वाले ने कहा, ‘मैंने शोमू (अरिजीत) को बड़ा होते देखा है। शोमू ने यहीं तैरना सीखा, उनके पिता ने उन्हें सिखाया था।’ सिंगर के बचपन के दोस्त से बात करते हुए उन्हें पता लगा कि इतनी सफलता के बावजूद अरिजीत को जियागंज अपनी ओर खींचता रहता है। सुरिंदर सिंह ने कस्बे से अपने बेटे के जुड़ाव पर कहा, ‘यह बहुत ही शांतिपूर्ण जगह है। मेरा बेटा भी मुंबई में नहीं रह सका और उसे वापस लौटना पड़ा।’ अरिजीत के चचेरे भाई राजू सिंह, जो वहीं उस इलाके में अरिजीत द्वारा शुरू किए गए एक रोस्टोरेंट में कैश काउंटर चलाते हैं, उन्होंने बताया कि परिवार अब मुश्किल से ही रेस्टोरेंट में आता है। उन्होंने कहा, ‘शोमू को रेस्तरां आने का समय ही नहीं मिलता। चाचा भी बहुत कम आते हैं।’

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