शादी के बाद विवाद रोकने राष्ट्रीय महिला आयोग की कवायद
भोपाल, विवाह के बाद वैवाहिक संबंधों में आने वाली कड़वाहट को खत्म करने के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग प्री मैरिटल कार्यक्रम शुरू कर रहा है। तेरे मेरे सपने नाम से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम की जानकारी सभी राज्यों को भेजकर इस पर अमल कराने के लिए कहा जा रहा है। इसमें विवाह के पहले लड़का-लड़की एक दूसरे को समझें, इस पर फोकस किया गया है। उन्होंने कहा कि शादी के पहले अगर लड़का और लड़की एक दूसरे को समझ लेते है तो यह विवाह ज्यादा लम्बे समय तक चलता है। इसी को बढ़ावा देने के लिए आयोग ने तेरे मेरे सपने एक प्री मैरिटल कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके आने वाले समय में अच्छे रिजल्ट आएंगे।
एआई का पॉजिटिव उपयोग हमारे लिए वरदान
बदलते दौर में एआई के प्रयोग और महिलाओं पर इसके संभावित असर को लेकर किए गए सवाल पर रहाटकर ने कहा कि एआई हमारे लिए वरदान है। करियर में इसका पॉजिटिव उपयोग करके आगे बढ़ने में मदद मिलती है। अभी डॉक्टर, नर्सेस और अन्य सेक्टर में इसके लिए काम किया है। हमने पुलिस की ट्रेनिंग की है कि महिलाओं के बारे में जो तकलीफ होती है, उसका एआई के जरिए कैसे निराकरण कर सकते हैं। आशा और आंगनबाड़ी में काम करने वाली महिलाएं एआई के जरिए कैसे रोजगार को आगे बढ़ा सकती हैं। इसके लिए भी काम किया जा रहा है।
महिला आयोग के गठन के लिए सरकार को पत्र लिखा
यहां हुई जनसुनवाई को लेकर रहाटकर ने कहा कि एमपी में राज्य महिला आयोग का पद लंबे समय से रिक्त है। इसको लेकर उनके द्वारा राज्य सरकार को पत्र लिखा गया है कि जल्दी ही यहां महिला आयोग का गठन करें ताकि महिलाओं की समस्या का समाधान समय पर हो सके। रहाटकर ने कहा विभागों में महिलाओं की प्रताड़ना के मामले में अंतरविभागीय समिति और पुलिस को समय सीमा में जांच करने के लिए कहा गया है।
सेक्सुअल हरासमेंट में दोषी पर कार्यवाही के निर्देश
महिलाओं की शिकायतों के मामले में पुलिस की देरी को लेकर कहा कि पुलिस अपना काम करती है। किसी तरह की गड़बड़ न हो, इसका ध्यान रखने के लिए कहा है। कामकाजी महिलाओं के सेक्सुअल हरासमेंट को लेकर उन्होंने कहा कि इसके लिए पहले से एक्ट प्रभावी है और इसकी जांच के आधार पर कार्यवाही की जाती है। विभागीय जांच में अगर किसी पुरुष के विरुद्ध आरोप साबित होना पाया जाता है तो इस मामले में कलेक्टर को तुरंत एक्शन लेने के लिए कहा गया है।
इसके साथ ही संबंधित विभाग के जिला अधिकारी की भी जिम्मेदारी है कि विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर कार्यवाही की जाए। उन्होंने कहा कि एक साल में 800 प्रकरण राष्ट्रीय महिला आयोग पहुंचे हैं जिसमें से 50 मामलों में सुनवाई एक दिन में की गई है। पुलिस को अलग-अलग प्रकरणों में सात दिन, 15 दिन और एक माह में एक्शन टेकेन रिपोर्ट देने के लिए कहा गया है।
