​पूजन स्थल पर कभी ना रखें देवी-देवताओं की ऐसी प्रतिमा, धन-धान्य की होती है हानि

वास्तुशास्त्र हर किसी के जीवन में अहम भूमिका अदा करता हैं और इसमें व्यक्ति के जीवन और उससे जुड़ी चीजों के रख रखाव के बारे में बताया गया हैं जिसका अगर पालन किया जाए तो सकारात्मक परिणाम मिलता हैं लेकिन अनदेखी समस्याओं को पैदा करती हैं।

वास्तुशास्त्र में घर के पूजन स्थल से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण बातें बताई हैं जिसके अनुसार मंदिर में देवी देवताओं की कुछ मूर्तियों को भूलकर भी नहीं रखना चाहिए। वरना घर का माहौल नकारात्मकता से भर जाता है जिसके कारण व्यक्ति को आर्थिक, मानसिक और शारीरिक कष्टों का सामना करना पड़ता हैं साथ ही धन धान्य की भी हानि होती हैं तो आइए जानते हैं कि वो कौन सी चीजें हैं।

पूजन स्थल से जुड़े नियम-
वास्तु अनुसार घर के मंदिर में भूलकर भी देवी देवताओं की खंडित प्रतिमा को नहीं स्थापित करना चाहिए। अगर कोई ऐसा करता हैं तो उसे पूजन का पूर्ण फल नहीं मिलता हैं इसके साथ ही भगवान की रौद्र रूप की प्रतिमा या तस्वीर को भी नहीं रखना चाहिए। हमेशा पूजन स्थल में भगवान की सौम्य रूप वाली व आशीर्वाद मुद्रा वाली मूर्तियों को ही स्थापित करना चाहिए ऐसा करने से घर में सुख शांति बनी रहती हैं। वास्तु की मानें तो घर के पूजन स्थल का स्थान उत्तर पूर्व यानी ईशान कोण में होना चाहिए। क्योंकि इन दिशाओं में देवी देवताओं का वास होता हैं और मंदिर का मुख कभी भी उत्तर या दक्षिण दिशा में नहीं होना चाहिए इसे शुभ नहीं माना जाता हैं।

अगर आपने पूजन स्थल पर शिवलिंग की स्थापना की हैं तो ऐसे में शिवलिंग का आकार अंगूठे से अधिक नहीं होना चाहिए या तो अंगूठे के बराबर हो या फिर इससे छोटा होना चाहिए। घर के पूजन स्थल पर बड़ा शिवलिंग रखना शुभ नहीं माना जाता हैं। इसके अलावा शिव के नटराज स्वरूप वाली प्रतिमा को भी घर में नहीं रखना चाहिए।
 

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