मणिपुर गांवों में सुरक्षा बलों की एंट्री पर नई शर्त

इम्फाल, मणिपुर में 3 साल से जातीय हिंसा चल रही है। राज्य में पूरी तरह शांति नहीं है। सोमवार को कांगपोकपी जिले के पोंग्रिंगलॅान्ग रोंग्मेई नगा गांव में कुकी उग्रवादी संगठन ने गोलीबारी की। इस घटना के बाद लापता चुन्जांग्लुंग पान्मेई नाम के नगा विलेज गार्ड का शव जंगलों से मिला है। उसके सिर पर गोली मारी गई थी।

नगा समूहों का आरोप है कि केंद्र कुकी समूहों का इस्तेमाल शैडो वॉर (छाया युद्ध) के तौर पर कर रहा है। इसके अलावा चिंग मामांग गांव में अज्ञात हथियारबंद लोगों ने गोलीबारी की, जिसमें एक घायल हुआ है। नगा संगठनों ने सुरक्षा बलों पर पक्षपात का आरोप लगाया है। साथ ही निष्पक्ष जांच की मांग की है।

गांव में सुरक्षा बलों की एंट्री से पहले विलेज अथॉरिटी को बताना जरूरी

इस बीच, नोने जिले के लोंग्जांग/ठंगाल गांव की विलेज अथॉरिटी ने राज्य पुलिस, असम राइफल्स, सीआरपीएफ को नोटिस दिया है। इसमें कहा है कि सूचना दिए बिना वे गांवों में नहीं आएं। ड्रोन भी न उड़ाएं।

मणिपुर हिल एरियाज विलेज अथॉरिटी एक्ट, 1956 के तहत गांवों की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी विलेज अथॉरिटी के पास है। तलाशी, गश्ती, छापेमारी, गिरफ्तारी से पहले विलेज अथॉरिटी को बताना जरूरी है।

NRC कराने की मांग को लेकर महिला महारैली

इम्फाल में सोमवार को 14 नागरिक संगठनों की महिलाओं ने 5 KM तक महारैली निकाली। NRC कराने और घुसपैठियों की पहचान कर बाहर करने की मांग को लेकर हजारों महिलाएं सड़कों पर उमड़ीं।

तीन साल में 731 मौतें

मणिपुर में जारी हिंसा-तनाव की वजह से बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रह रहे हैं। आरटीआई से मांगी गई जानकारी में सामने आया है कि तीन साल में 731 विस्थापित अपनी जान गंवा चुके हैं। चूराचांदपुर में सबसे ज्यादा 248, बिष्णुपुर में 151 और कंग्पोक्पी में 128 मौतें दर्ज हुईं हैं। जबकि राज्य के 9 जिलों में अभी भी 43,676 लोग विस्थापित हैं।

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