कैश और कार्ड नहीं… UPI पेमेंट बना फेवरेट, डिजिटल ट्रांजेक्शन में हुई हिस्सेदारी

नई दिल्ली: एक समय था जब लोग पेमेंट के लिए कैश पर निर्भर रहते थे। बाद में ज्यादातर लोग डिजिटल पेमेंट करने लगे। फिर प्लास्टिक मनी का भी चलन बढ़ा। लोग डेबिट या क्रेडिट कार्ड से पेमेंट को तवज्जो देने लगे। समय ने फिर करवट ली और देश में आया यूपीआई पेमेंट सिस्टम। ना कैश की जरूरत और ना ही डेबिट या क्रेडिट कार्ड की। फोन निकालो, क्यूआर कोड स्कैन करो और पलक झपकते ही पैसा दूसरे शख्स के अकाउंट में। डिजिटल पेमेंट के लिए आज यूपीआई लोगों का फेवरेट सिस्टम बन गया है। एक सर्वे के मुताबिक डिजिटल पेमेंट में यूपीआई की हिस्सेदारी बढ़कर 80 फीसदी हो गई है।

वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवाओं के विभाग की ओर से जारी एक स्टडी रिपोर्ट के मुताबिक डिजिटल पेमेंट और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर में काफी बढ़ोतरी हुई है। डिजिटल ट्रांजेक्शन लगभग 11 गुना बढ़ गए हैं। कुल डिजिटल ट्रांजेक्शन में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 80% हो गई है, जिससे यह सबसे मुख्य पेमेंट मीडियम बन गया है। UPI क्यूआर कोड का इस्तेमाल भी 9.3 करोड़ से बढ़कर 65.8 करोड़ हो गया है, जिससे व्यापारी आसानी से इसे अपना पा रहे हैं। फिनटेक और बैंकों की भागीदारी भी बढ़ी है, जिससे थर्ड-पार्टी ऐप प्रोवाइडर की संख्या 16 से बढ़कर 38 हो गई है। इससे पूरा सिस्टम और मजबूत हुआ है।

युवाओं ने बदली तस्वीर

देश में डिजिटल पेमेंट की तस्वीर बदलने में युवाओं की हिस्सेदारी काफी अहम हो रही है। खासकर 18 से 25 साल के युवा यूपीआई को बहुत पसंद करते हैं। इस आयु वर्ग में यूपीआई का इस्तेमाल 66% तक पहुंच गया है। यह दिखाता है कि लोग अब डिजिटल तरीके से पैसों का लेन-देन करने के आदी हो रहे हैं।

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