मुठभेड़ में ढेर हुआ कुख्यात नक्सली माड़वी हिड़मा

रायपुर। नक्सल मोर्चे पर सुरक्षाबलों को सबसे बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़-आंध्र प्रदेश बॉर्डर पर हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने कुख्यात नक्सली माड़वी हिड़मा को मार गिराया है। मुठभेड़ में उसकी पत्नी भी मारी गई है। 

माड़वी हिड़मा, जो सुरक्षा बलों पर सशस्त्र हमलों के कई मामलों में वांछित शीर्ष नक्सली कैडरों में से एक था, के मारे जाने की पुष्टि के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शीर्ष अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। सूत्रों के अनुसार, हिड़मा का खात्मा सुरक्षा बलों द्वारा निर्धारित 30 नवंबर, 2025 की समय सीमा से काफी पहले हो गया।

गृह मंत्री अमित शाह की प्रतिक्रिया

गृह मंत्री अमित शाह ने इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर संतोष व्यक्त किया और इस अभियान में शामिल सभी अधिकारियों और जवानों की सराहना की। उन्होंने शीर्ष अधिकारियों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति पर भी चर्चा की। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि मांदवी हिड़मा के मारे जाने के बाद नक्सली संगठन में कोई नई नेतृत्व उभर न सके और उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाया जा सके।

हिड़मा का नाम लंबे समय से नक्सली हिंसा से जुड़ा रहा है। वह सुरक्षा बलों पर हुए कई बड़े और घातक हमलों के पीछे मास्टरमाइंड माना जाता था। उसकी गिरफ्तारी या निष्प्रभावीकरण सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक प्रमुख लक्ष्य था। मंगलवार सुबह आंध्रप्रदेश के एएसआर जिले के रामपचोदवरम उपमंडल स्थित मारेदुमिल्ली के पास हुई मुठभेड़ में हिड़मा समेत छह नक्सली ढेर किए गए हैं।

सुरक्षा बलों ने एक जटिल और चुनौतीपूर्ण अभियान के तहत हिड़मा को निष्प्रभावी करने में सफलता प्राप्त की है। यह सफलता न केवल खुफिया जानकारी के प्रभावी उपयोग का प्रमाण है, बल्कि जमीनी स्तर पर तैनात जवानों के साहस और दृढ़ संकल्प का भी परिणाम है।

मौके से दो AK-47, एक रिवॉल्वर और एक पिस्तौल बरामद की गई है। यह अनुमान लगाया जा रहा है कि AK-47 हिड़मा की ही रही होगी, क्योंकि वह हमेशा इसी हथियार से लैस रहता था।

कौन था माड़वी हिड़मा?
हिड़मा बस्तर में नक्सल आतंक का सबसे बड़ा चेहरा माना जाता था। इसका असली नाम संतोष उर्फ इंदमुल उर्फ पोडियाम भीमा था। उसका जन्म सुकमा के पूवर्ती गांव में हुआ था। वह वर्ष 1990 में नक्सल संगठन से जुड़ा और 13 साल की उम्र में ही टॉप कमेटी में शामिल कर लिया गया। बताया जाता है कि वह केवल 10वीं तक शिक्षित था और हमेशा अपने साथ एक नोटबुक रखता था। 

बड़े नक्सली हमलों का मास्टरमाइंड:
2010 का ताड़मेटला हमला – CRPF के 76 जवान शहीद
2013 का झीरम घाटी हमला – कांग्रेस के कई दिग्गज नेता शहीद
2017 का बुरकापाल हमला – CRPF के 25 जवान शहीद
हिड़मा ने फिलीपींस में गुरिल्ला युद्ध की ट्रेनिंग भी ली थी।

हिड़मा के गढ़ में फोर्स का दबदबा
हाल ही में हिड़मा के गांव से लगे इलाकों—मुलेर, परिया, टेकलगुडेम, पूवर्ती, सलातोंग, पुलनपाड़ समेत कई दुर्गम क्षेत्रों में नए पुलिस कैंप खोले गए हैं। इससे नक्सलियों की आवाजाही सीमित हुई, संगठन की सप्लाई लाइन कमजोर पड़ी और ग्रामीणों में सुरक्षा की भावना बढ़ी। 

बस्तर में चल रहे इस बड़े अभियान ने नक्सली नेटवर्क को पीछे ढकेल दिया है। गोल्लाकुंडा जैसे इलाकों में कैंप खुलने से बीजापुर-सुकमा के भीतरू क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की पकड़ और मजबूत हुई है।

मुठभेड़ में ढेर नक्सलियों की सूची
हिड़मा – सीसी सदस्य
मदगाम राजे – हिड़मा की पत्नी, SZCM
लकमल – DCM सदस्य
कमलू – PPCM सदस्य
मल्ला – PPCM सदस्य
देवे – हिड़मा का रक्षक

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *