अमावस्या के दिन शिवलिंग पर अर्पित करें ये पांच चीजें, बन जाएंगे बिगड़े काम

इस वर्ष अधिक मास अमावस्या 16 अगस्त दिन बुधवार को है। अधिक मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 15 अगस्त को दोपहर 12:42 बजे से प्रारंभ हो जाएगी तथा यह तिथि 16 अगस्त को दोपहर 03:07 बजे तक उपस्थित रहेगी।

उसके पश्चात् से सावन शुक्ल पक्ष प्रारंभ हो जाएगा। वही ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, पुरुषोत्तमी अमावस्या तिथि पर शिवलिंग पर इन चीजों को चढ़ाया जाए तो जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं तथा पितरों का भी आशीर्वाद मिलता है। आइए आपको बताते हैं पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर किन चीजों को चढ़ाना चाहिए…

* पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन प्रदोष काल में शिवलिंग पर शहद एवं सफेद तिल चढ़ाना बहुत शुभ माना जाता है। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है तथा रक्तचाप एवं डायबिटीज की बीमारी भी दूर रहती है। साथ ही रूप व सौंदर्य भी मिलता है तथा समाज में यश व सम्मान बढ़ता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सभी पाप नष्ट होते हैं तथा आरोग्य की प्राप्ति भी होती है।

* पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल एवं बेलपत्र के साथ चांदी के नाग नागिन चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से सर्प दोष के साथ पितृ दोष खत्म होता है तथा पितरों का आशीर्वाद भी मिलता है। मान्यता है कि चांदी के नाग नागिन अर्पित करने से सुख समृद्धि और धन प्राप्ति के मार्ग भी बनते हैं।

*आक का पत्ता महादेव को प्रिय है इसलिए पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर आक का पत्ता चढ़ाना चाहिए। ऐसा करने से मानसिक और शारीरिक परेशानियां दूर रहती हैं तथा ग्रहों का शुभ प्रभाव भी मिलता है। साथ ही भगवान महादेव की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं।

* पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन शिवलिंग पर गन्ने का जूस चढ़ाना बहुत फलदायी माना जाता है। ऐसा करने से पितृ दोष दूर होता है तथा सांसारिक सुखों की प्राप्ति होती है। गन्ने का रस शिवलिंग पर चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते रहें। मान्यता है कि गन्ने का रस चढाने से आर्थिक संकट दूर होता है तथा जीवन में सुख समृद्धि का वास होता है।

* पुरुषोत्तमी अमावस्या के दिन यदि संभव हो सके तो 108 बेलपत्र पर सफेद चंदन से राम लिख लें तथा फिर शिवलिंग पर ॐ नमः शिवाय मंत्र का जप करते हुए चढ़ाएं। यदि 108 बेलपत्र संभव नहीं है तो 11 बेलपत्र भी चढ़ा सकते हैं। ऐसा करने से ग्रह दोष दूर होते हैं तथा पितृ दोष भी दूर होता है। इस उपाय को पंचमी तिथि, त्रयोदशी तिथि और चतुर्दशी तिथि को भी कर सकते हैं।
 

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