अजाक्स की तर्ज पर सजाक्स संगठन बनाने की तैयारी

‘अनुसूचित जाति-जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स)’ से मैदानी मुकाबले के लिए सामान्य वर्ग के कर्मचारी ‘सनातनी,सामान्य,ओबीसी,अल्पसंख्यक अधिकारी-कर्मचारी एवं पेंशनर्स संघ (सजाक्स)’ का गठन करने जा रहे हैं। आईएएस और अजाक्स के अध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए विवादित बयान के बाद यह निर्णय लिया गया है।

सजाक्स के गठन के लिए मंत्रालय अधिकारी-कर्मचारी सेवा संघ के अध्यक्ष सुधीर नायक को अधिकृत किया गया है। इस संगठन की सक्रिय शाखाएं ग्राम पंचायत और नगरीय निकाय तक होंगी। इनके संरक्षक केंद्र व राज्य के पूर्व मंत्री, हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जस्टिस रहेंगे। संगठन एससी-एसटी की तरह सामान्य, ओबीसी वर्ग के मामलों में त्वरित और जमीनी प्रतिक्रिया देगा।

विचार गोष्ठी में हुआ मंथन

आईएएस संतोष वर्मा के मामले में सरकार के लचीले रवैये को देखते हुए पिछले दिनों सामान्य एवं सवर्ण समाज के लोग तुलसीनगर स्थित संकटमोचन हनुमान मंदिर में इकट्‌ठा हुए थे। यहां विचार गोष्ठी हुई, जिसमें वर्मा के विवादित बयान का जिक्र करते हुए कहा गया कि अब ऐसे संगठन की जरूरत है, जो सामान्य और सवर्ण समाज का वजूद स्थापित कर सके। अभी तो ऐसी दुर्दशा है कि देश और प्रदेश में लगातार 20 दिन से प्रदर्शन के बाद वर्मा के खिलाफ एफआईआर तक नहीं हुई। जबकि दूसरे मामलों में भोपाल बोलने पर नगालैंड में एफआईआर हो जाती है।

समयमान वेतनमान पर चर्चा

गोष्ठी में सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों के लिए समयमान वेतनमान लागू नहीं किए जाने पर भी चर्चा हुई। कहा गया कि सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग की आबादी प्रदेश में 64% है और एससी-एसटी की 36% है, फिर भी 36% हावी है। हाईकोर्ट कई फैसलों में कह चुका है कि सामान्य, पिछड़ा और अल्पसंख्यक वर्ग की पदोन्नति पर कोई रोक नहीं है, लेकिन एससी-एसटी को पदोन्नति नहीं दी जा सकती, इसलिए कोई कारण न होते हुए भी एक दशक से सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग को पदोन्नति नहीं दी जा रही है। कोर्ट की अवमानना के केस लगने पर भी इन वर्गों को पदोन्नति नहीं दी गई।

एक दशक में एक लाख से ज्यादा कर्मचारी बिना पदोन्नति रिटायर हो गए, जिसमें अधिकांश सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग के थे। जब मांग की गई कि पदोन्नति 2016 से ही शुरू की जाए, तो ये बात नहीं मानी गई। क्योंकि सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारी-अधिकारी को फायदा हो सकता था। इसके बाद समयमान वेतनमान के साथ पदनाम ही देने की बात भी नहीं मानी गई, क्योंकि इससे सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारी एससी-एसटी की बराबरी पर आ जाते।

गलती होने पर भी साथ दें

गोष्ठी में कहा गया कि जैसे एससी-एसटी वर्ग में होता है, गलत होने पर भी पूरा वर्ग अपने का साथ देता है, वैसा ही हमें भी करना है। वर्मा के तमाम फर्जीवाड़े उजागर होने के बाद भी एससी-एसटी वर्ग उनके समर्थन में खड़ा है।

संगठन की मांगें और उद्देश्य

  • 2016 से अब तक रिटायर हुए कर्मचारियों को भूतलक्षी प्रभाव से पदोन्नति देकर उनकी पेंशन का पुनर्निर्धारण किया जाए।
  • एससी-एसटी वर्ग की 2002 से 2016 के बीच असंवैधानिक ढंग से ली गई पदोन्नतियां समाप्त कराकर उन्हें रिवर्ट कराया जाए।
  • एससी-एसटी आरक्षण में क्रीमी लेयर और उपवर्गीकरण लागू किया जाए।
  • सनातन धर्म छोड़कर बौद्ध या क्रिश्चियन बन चुके एससी-एसटी को आरक्षण न दिया जाए।
  • सनातन धर्म या अन्य किसी भी धर्म के देवी देवताओं, ऋषि मुनियों, पौराणिक पात्रों, महान पुरुषों, रीति रिवाजों, परंपराओं की निंदा करने, मजाक उड़ाने पर कड़ी कार्रवाई करने का कानून बने।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य में आरक्षण समाप्त किया जाए और केवल और केवल योग्यता के आधार पर शिक्षक, प्रोफेसर, डाक्टरों की नियुक्ति हो।
  • किसी भी स्थिति में निजी क्षेत्र में आरक्षण लागू न हो और आरक्षण को नवमी अनुसूची में शामिल न हो।
  • बच्चों को आरक्षण के दुष्प्रभावों से अवगत कराने के लिए जागरुकता अभियान चलाया जाए।

इन मांगों को भी संगठन कराएगा पूरा

  • सामान्य वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा, शक्तियां दी जाएं।
  • निर्धन, सामान्य, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग के कल्याण की योजनाएं बनवाने संघर्ष करना।
  • इंदिरा साहनी केस में निर्धारित 50% की सीमा के अनुसार एससी-एसटी आरक्षण 36% के स्थान पर आधा अर्थात 18% कराना।
  • अभी तक आरक्षण से वंचित एससी-एसटी वर्ग के लोगों को आरक्षण का लाभ दिलवाना।
  • सामान्य, पिछड़ा अल्पसंख्यक वर्ग के बच्चे आउटसोर्स में ही भर्ती हो पा रहे हैं। इसलिए आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित के समतुल्य वेतन मिले, इसके लिए संघर्ष करना।
  • अंतर्जातीय विवाह पर मिलने वाली प्रोत्साहन राशि बंद की जाए। माता पिता की सहमति से धार्मिक पद्धति से होने वाले विवाहों को प्रोत्साहित किया जाए।
  • एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट का व्यापक पैमाने पर हो रहा दुरुपयोग रोकने के उपाय किए जाएं।

ये शामिल रहे गोष्ठी में

गोष्ठी में राजपत्रित अधिकारी संघ के अशोक शर्मा, मंत्रालय संघ के अनिल तिवारी, सुधीर नायक, आलोक वर्मा, राजकुमार पटेल, हरिशरण द्विवेदी, अंकित अवधिया, मनोज गुप्ता, अनूप अवस्थी, शैलेन्द्र शर्मा, राजेश नेमा, साधना मिश्रा, सुनील पारीक, निगम मंडल कर्मचारी संघ की ओर से अनिल वाजपेयी, गजेन्द्र कोठारी, श्याम सुंदर शर्मा, संजना रिछारिया, अरविन्द शर्मा, लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ की ओर से महमूद खान,एमएल शर्मा, संतोष दीक्षित, राजेन्द्र शर्मा, बोर्ड आफिस कर्मचारी संघ की ओर से प्रमोद मेवाड़ा, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ की ओर से विजय रघुवंशी, उमाशंकर तिवारी, राजेश तिवारी शामिल रहे।

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