EPFO की तरह होंगे प्राइवेट PF ट्रस्टों के नियम, दूर होगा कनफ्यूजन, मुकदमों में आएगी कमी

नई दिल्ली: बजट में उन ‘प्रोविडेंट फंड ट्रस्टों’ के नियमों में सुधार का प्रस्ताव रखा गया है जिन्हें इनकम टैक्स नियम के तहत छूट मिलती थी। अब इन ट्रस्टों को पूरी तरह से कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नियमों के बराबर लाया जाएगा। EPFO ने इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि इससे विभिन्न नियमों को एक-दूसरे के अनुरूप बनाने और तालमेल बिठाने से स्टेकहोल्डर्स के हितों को मजबूती मिलेगी। अभी तक समस्या यह थी कि प्राइवेट पीएफ ट्रस्टों को टैक्स छूट मिलने की शर्तों में इनकम टैक्स कानून और पीएफ एक्ट (1952) की धारा 17 के बीच अंतर था।

निवेश करने के तरीकों में भी काफी फर्क रहता था। यहां तक कि कंपनी (एम्प्लॉयर) द्वारा किए जाने वाले योगदान की सीमा भी दोनों कानूनों में एक जैसी नहीं थी। अब मान्यता प्राप्त प्रोविडेंट फंड (PF ट्रस्ट) इनकम टैक्स ऐक्ट, 2025 की अनुसूची (Schedule) XI के हिसाब से चलेंगे। निवेश के नियमों को भी ईपीएफ के हिसाब से कर दिया गया है और कंपनी के योगदान की सीमा को इनकम टैक्स एक्ट के साथ जोड़ दिया गया है।

क्या होगा फायदा?

इनकम टैक्स ऐक्ट, 2025 के तहत मान्यता अब उन्हीं प्रोविडेंट फंड्स को मिलेगी, जिन्होंने EPF ऐक्ट, 1952 की धारा 17 के तहत छूट ली हुई है। धारा 17 के तहत, कंपनियां अपने कर्मचारियों के पीएफ खातों और पैसों को खुद मैनेज करने के लिए मासिक ईपीएफ रिटर्न फाइल करने से छूट मांग सकती हैं। श्रम मंत्रालय ने बयान में कहा कि बजट 2026-27 में मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि (पीएफ) से जुड़े आयकर ढांचे को कर्मचारी भविष्य निधि एवं विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 और कर्मचारी भविष्य निधि योजना, 1952 के वैधानिक और प्रशासनिक प्रावधानों के अनुरूप कर दिया गया है।फिलहाल निजी पीएफ ट्रस्ट को आयकर अधिनियम और ईपीएफ अधिनियम की धारा 17 के तहत छूट की पात्रता में अंतर है। इसके अलावा, आयकर प्रावधानों और ईपीएफओ के तहत अधिसूचित निवेश के तरीके भी अलग हैं, जबकि नियोक्ता के अंशदान की सीमा दोनों कानूनों में समान नहीं है। इन भिन्नताओं से भ्रम की स्थिति पैदा होती है और अनावश्यक मुकदमेबाजी बढ़ती है। मान्यता-प्राप्त भविष्य निधि ट्रस्ट का नियमन आयकर अधिनियम, 2025 की अनुसूची-11 के तहत होता है।

निवेश की अनिवार्य सीमी हटी

नए प्रावधानों के तहत आयकर अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पीएफ की मान्यता केवल उन्हीं ट्रस्ट को मिलेगी जिन्हें ईपीएफ अधिनियम, 1952 की धारा 17 के तहत छूट मिली हुई है। धारा 17 के तहत नियोक्ता अपने कर्मचारियों के पीएफ खातों के प्रबंधन और मासिक ईपीएफ रिटर्न दाखिल करने से छूट के लिए आवेदन कर सकते हैं। ईपीएफओ ने निवेश के मोर्चे पर कहा कि निवेश मानदंड अभी मौजूदा ईपीएफ ढांचे और अधीनस्थ विधानों के तहत ही नियंत्रित रहेंगे। साथ ही, सरकारी प्रतिभूतियों में 50 प्रतिशत निवेश की अनिवार्य सीमा को हटा दिया गया है।

एम्प्लॉयर के कंट्रीब्यूशन के संबंध में कहा गया कि अब यह 7.5 लाख रुपये प्रति वर्ष की मौद्रिक सीमा के अधीन होगा। इस सीमा से अधिक अंशदान पर परिलाभ के रूप में कर लगाया जाएगा। ईपीएफओ ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में आयकर प्रणाली को युक्तिसंगत बनाना हितधारकों के हितों को साधने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे स्पष्ट हो गया है कि अब ईपीएफ से जुड़ी छूट कर्मचारी भविष्य निधि और विविध प्रावधान अधिनियम, 1952 से ही नियमित होगी। साथ ही, निवेश मानदंडों और नियोक्ता अंशदान की सीमाओं को भी आयकर अधिनियम के अनुरूप कर दिया गया है।
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