प्रियंका तेलंगाना और मध्यप्रदेश के चुनावों के लिए पार्टी के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार

नई दिल्ली । हिमाचल प्रदेश और कर्नाटक विधानसभा चुनावों में शानदार जीत के बाद अब कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा तेलंगाना और मध्य प्रदेश के चुनावों के लिए पार्टी के अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। दोनों राज्यों में साल के आखिर में विधानसभा चुनाव होने हैं।
प्रियंका गांधी पहले ही तेलंगाना में एक रैली कर चुकी हैं। उनके 12 जून को मध्यप्रदेश में एक रैली को संबोधित करने की उम्मीद है। यहां वह महिलाओं को 1500 रुपये की इनकम गारंटी के पार्टी के वादे को आगे बढ़ा सकती हैं। सूत्रों ने बताया कि प्रियंका के छत्तीसगढ़ में बड़े पैमाने पर चुनाव प्रचार करने की भी संभावना है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी साल के आखिर में चुनाव होने हैं।
प्रियंका गांधी ने महिला संवाद (महिला मंच) को पिछले साल उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अभियान में लागू किया था। यह हाल में संपन्न हुए कर्नाटक चुनावों में कांग्रेस के अभियान का भी हिस्सा रहा। महिला संवाद कांग्रेस के आगामी चुनाव अभियानों का भी एक अभिन्न हिस्सा होगा। इसमें महिलाओं के लिए आय समर्थन, मुफ्त सिलेंडर और मुफ्त सार्वजनिक परिवहन का वादा शामिल है। कर्नाटक में कांग्रेस की पांच गारंटियों में ये भी इसे शामिल किया गया है। ऐसा माना जाता है कि पांच गारंटी के वादे ने कांग्रेस को कर्नाटक चुनाव में प्रचंड बहुमत दिलाने में काफी मदद की।
प्रियंका गांधी के करीबी एक पार्टी नेता ने कहा, यूपी चुनाव के बाद कांग्रेस की सोच में बदलाव आया है। पार्टी अब महिला मतदाताओं पर अलग से फोकस कर रही है। पार्टी नेतृत्व समझ गया है कि बढ़ती महंगाई का समाधान चाहती हैं। दूसरी बहुत महत्वपूर्ण बात यह है कि महिला उम्मीदवारों की संख्या बढ़ाई जाए। इसपर प्रियंका गांधी पहले से जोर दे रही हैं। भले ही उनकी अपनी पार्टी के नेता इस विचार को सिरे से खारिज करते हैं। 
कर्नाटक के चुनाव नतीजों ने कांग्रेस की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। इससे पार्टी को आगामी विधानसभा चुनावों में और 2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी के खिलाफ नई ऊर्जा के साथ लड़ने का मौका मिला है। सूत्रों के अनुसार, कर्नाटक में प्रियंका गांधी का हस्तक्षेप विशेष रूप से महत्वपूर्ण था, क्योंकि मानहानि केस में राहुल गांधी के दोषी करार दिए जाने और सांसदी रद्द होने के बाद कांग्रेस के चुनावी अभियान पर प्रभाव पड़ा था।

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