रैरा में पंजीयन के डेढ़ साल बाद भी प्रोजेक्ट बंद, हाउसिंग बोर्ड को भुगतान पड़ेगा आठ प्रतिशत ब्याज

ग्वालियर। शहर में 200 करोड़ रुपए से अधिक लागत वाले दो प्रोजेक्ट का रैरा में पंजीयन कराने के बाद हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों की गलती से डेढ़ साल बाद भी काम शुरू नहीं हो पाया है। इन दोनों प्रोजेक्ट के टेंडर की शर्तों में गड़बड़ी के कारण बाद में प्रक्रिया निरस्त करनी पड़ी। यह स्थिति तब है, जबकि सब इंजीनियर से लेकर उपायुक्त स्तर तक के अधिकारी इन दस्तावेजों को आनलाइन और आफलाइन जांच करने के बाद मुख्यालय में स्वीकृति के लिए भेजते हैं। इन प्रोजेक्ट के लिए हाउसिंग बोर्ड ने हितग्राहियों की बुकिंग भी कर ली, लेकिन काम शुरू नहीं होने के कारण अब राजस्व के नुकसान के साथ ही आठ प्रतिशत ब्याज भुगतने की स्थिति बन गई है। इसका कारण है कि जिन प्रोजेक्ट के लिए बोर्ड ने तीन साल का समय मांगा था, उन्हें पूरा करने के लिए अब सिर्फ मार्च 2025 तक का समय ही बचा है यानी सिर्फ 10 महीनों में तीन साल जितना निर्माण करना होगा, जो संभव नहीं है। ऐसे में हितग्राहियों से लिए गए पैसे पर आठ प्रतिशत ब्याज भुगतनी पड़ेगी। दरअसल, हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों ने दीनदयाल नगर के सेक्टर ए में अटल कुंज टावर का निर्माण कार्य शुरू करने का समय अक्टूबर 2022 रखा था। इसे एक अक्टूबर 2022 से शुरू होना था और सात मार्च 2025 तक कार्य समाप्त करना है, लेकिन स्थिति यह है कि मौके पर अभी नींव खोदाई तक का काम भी पूरा नहीं हो पाया है। इसका टेंडर राजकोट गुजरात की रेवा कंस्ट्रक्शन कंपनी को दिया गया था। लेकिन जीएसटी की विसंगति के कारण टेंडर रद कर दिया गया। इसका कारण अधिकारियों द्वारा लापरवाही से तैयार की गईं शर्तें थीं। अब स्थिति यह है कि रैरा द्वारा दी गई समय सीमा बीतने में 10 महीने बचे हैं। कुछ यही स्थिति थाटीपुर में 160 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 150 आवासों की स्थिति है।

-130 से अधिक हितग्राहियों से की बुकिंग

अटल कुंज टावर में कुल 138 दुकानें और 60 फ्लैट तैयार करने की योजना है। दुकानों का साइज 200 से 350 वर्गफीट है और इनकी कीमत 13 से 22 लाख रुपए है। वहीं फ्लैटों में 700 वर्गफीट क्षेत्रफल के 28 टू बीएचके और 1100 वर्गफीट क्षेत्रफल वाले 32 थ्री बीएचके फ्लैट शामिल हैं, जिनकी कीमत 27.80 लाख से लेकर 40.31 लाख रुपये निर्धारित की गई थी। इसके अलावा 50 आफिस स्पेस या हाल भी बनाए गए हैं। इन्हीं कीमतों के आधार पर बुकिंग शुरू की गई थी। वर्तमान में 138 में से 88 दुकानें बुक हो चुकी हैं, जबकि 60 में से 42 फ्लैटों की बुकिंग कर ली गई है। इस प्रकार कुल 130 ग्राहकों की बुकिंग हुई है। इनसे बोर्ड ने लगभग चार करोड़ रुपए की राशि ली है।

 

-लंबा-चौड़ा सिस्टम, फिर भी गलतियां-

किसी भी प्रोजेक्ट का एस्टीमेट या निविदा आमंत्रण का प्रस्ताव तैयार करने के लिए विशेषज्ञ इंजीनियरों द्वारा कवायद की जाती है। बोर्ड की प्रक्रिया के अनुसार उपयंत्री से लेकर कार्यपालन यंत्री तक के हस्ताक्षर से प्रपोजल को वृत्त कार्यालय में तकनीकी जांच के लिए भेजा जाता है। वहां तकनीकी अधिकारी द्वारा इसका मूल्यांकन किया जाता है। यदि सब कुछ ठीक है, तो इसे आगे उपायुक्त के पास भेजा जाता है। यदि कोई विसंगति है, तो इसमें सुधार कराया जाता है। उपायुक्त द्वारा अंत में इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा जाता है। थाटीपुर और अटल कुंज टावर प्रोजेक्ट में जीएसटी की विसंगति सामने आई। ऐसे में इस लंबे-चौड़े सिस्टम में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

हम एक्सटेंशन लेने का प्रयास करेंगे

यह सही है कि अटल कुंज टावर और थाटीपुर प्रोजेक्ट के टेंडर निरस्त किए गए हैं। जहां तक रैरा के पंजीयन की बात है, तो अभी तक काम ही शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में हम प्रोग्रेस रिपोर्ट देकर एक्सटेंशन लेने का प्रयास करेंगे, ताकि ब्याज न लगे।

एनडी अहिरवार, उपायुक्त हाउसिंग बोर्ड

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