पाकिस्तान-चीन में धार्मिक स्वतंत्रता खतरे में

वासिंगटन । अमेरिका ने पाकिस्तान और चीन का नाम धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के मामले में चिंता वाले देशों की लिस्ट में रखा है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने प्रेस रिलीज में कहा कि इस लिस्ट में म्यांमार, रूस, ईरान, नॉर्थ कोरिया और सऊदी अरब सहित कई देशों के नाम हैं। इन देशों को कंट्रीस ऑफ पर्टिकुलर कंसर्न की लिस्ट में डाला गया है। यहां धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन से जुड़े गंभीर मामले दर्ज किए गए हैं। वहीं पाकिस्तान ने अमेरिका की रिपोर्ट को खारिज कर दिया है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने कहा- यह दावा एकतरफा, भेदभाव और मनमाने पैमानों पर आधारित है। ऐसे कदम वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता को आगे बढ़ाने के इस्लामाबाद और वॉशिंगटन के लक्ष्य को कमजोर करते हैं।
पाकिस्तान ने कहा- हम एक बहुलवादी देश हैं। हमने धार्मिक स्वतंत्रता को बढ़ावा देने और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा के लिए कई कदम उठाए हैं। पाकिस्तान को विश्वास है कि धार्मिक असहिष्णुता, जेनोफोबिया और इस्लामोफोबिया का मुकाबला आपसी समझ और सम्मान के आधार पर किया जा सकता है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर द्विपक्षीय रूप से अमेरिका के साथ बातचीत भी की है। पाकिस्तान में ईशनिंदा कानूनों के इस्तेमाल की जांच नहीं होने पर विश्व स्तर पर आलोचना होती रही है। इन कानूनों का गलत इस्तेमाल करके कट्टरपंथी समुदाय हिंदू, सिख, ईसाई, जैन, बौद्ध, अहमदिया मुस्लिम जैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाते हैं।
अगस्त 2023 में पाकिस्तान के फैसलाबाद में एक चर्च को जलाए जाने के बाद भीड़ ने ईशनिंदा के आरोप लगाए थे। 2021 में एक व्यक्ति पर ईशनिंदा का आरोप लगाने के बाद गुस्साई भीड़ ने उत्तर-पश्चिमी पाकिस्तान में एक सदी पुराने मंदिर पर हमला किया था। इसके अलावा सियालकोट में श्रीलंकाई व्यवसायी प्रियंता कुमारा की पीट-पीटकर हुई हत्या के बाद भी ग्लोबल लेवल पर पाकिस्तान के ईशनिंदा कानूनों की आलोचना हुई थी। मीडिया रिपोट्र्स के मुताबिक पाकिस्तान में जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण और जबरन शादी जैसे अपराध भी बड़े पैमाने पर होते हैं। सरकार इन गतिविधियों को रोकने के लिए पर्याप्त कार्रवाई करने में विफल रही है। इससे पहले 2022 में आई सीपीसी की लिस्ट में पाकिस्तान और चीन का नाम शामिल था।

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