45 बार रक्तदान कर मिसाल बने सतीश श्रीवास्तव….

रक्तदान एक महादान है खून की कमी से होने वाली मौतों को रोकने के साथ ही कई जिंदगी को बचाने के लिए 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस का आयोजन किया जाता है। इस क्रम में दंतेवाडा मुख्यालय के ब्लॉक कालोनी निवासी 61 वर्षीय सतीश श्रीवास्तव द्वारा रक्तदाता के रूप में सराहनीय योगदान दिया जा रहा है। इस संबंध में श्रीवास्तव  बताते है कि वे 45 से अधिक बार रक्तदान कर चुके हैं और उनका लक्ष्य 50 से अधिक बार रक्तदान करना है। 

उन्होंने बताया कि रक्तदान के महत्व को उन्होंने तब समझा जब उनकी तीन वर्षीय बच्ची को रक्त की आवश्यकता पड़ी। जिसके लिए उन्होंने पहली बार रक्तदान किया। लेकिन बेटी की हालात में सुधार न होने पर डॉक्टरों द्वारा मना करने पर भी दोबारा रक्तदान किया। दुर्भाग्यवश उनकी बच्ची फिर भी नहीं बच सकी उस दिन से उन्होंने रक्तदान करना अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया।

एक बार तो उन्होंने भिलाई के अस्पताल में भर्ती अपनी बीमार पत्नी के कक्ष में मौजूद एक अन्य मरीज को भी तत्काल रक्तदान किया था। अब वे अक्सर जिला अस्पताल में रक्तदान करते रहते हैं रक्तदान करते हुए उन्हें सबसे अधिक खुशी तब मिली जब वे एक बार किसी काम से दूरस्थ कटेकल्याण ब्लॉक गए हुए थे, तब वहीं के किसी अजनबी व्यक्ति ने उन्हें दूर से पहचान कर उनका शुक्रिया अदा करते हुए अपने घर आमंत्रित किया। सतीश ने रक्तदान कर उनकी मदद की थी। सतीश मानते हैं कि प्रत्येक व्यक्ति को रक्त दान करने हेतु आगे आना चाहिए। किसी के अनमोल जीवन को बचाने के लिए रक्तदान से बढ़कर और कोई पुण्य नहीं है।

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