भारत को ओर मुड़ने लगे सऊदी अरब से आने वाले तेल टैंकर, फरवरी में बना रेकॉर्ड, रूस रह गया काफी पीछे

नई दिल्ली: रूसी तेल पर अमेरिकी बैन के बाद भारत ने मॉस्को से खरीद कम कर दी है। वहीं सऊदी अरब से आयात बढ़ गया है। सऊदी अरब से भारत का कच्चा तेल आयात फरवरी में अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गया है। यह नवंबर 2019 के बाद सबसे ज्यादा है। टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक फरवरी में यह लगभग 1 से 1.1 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) रहा। इस दौरान सऊदी अरब अस्थायी रूप से रूस को पीछे छोड़कर भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बन गया।

ग्लोबल डेटा और एनालिटिक्स सर्विस प्रोवाइडर केप्लर (Kpler) के अनुसार 20 फरवरी (शुक्रवार) को पश्चिम एशियाई देश से कच्चे तेल का आयात 1.3 मिलियन बैरल तक पहुंच गया। यह रूस की लगभग 1.1 mbd की सप्लाई से कहीं ज्यादा था। पिछले कुछ सालों से सऊदी अरब भारत के कच्चे तेल आयात में तीसरे या चौथे स्थान पर रहा है। रूस हमेशा टॉप पर रहा है, जबकि इराक और यूएई अन्य दो प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहे हैं।

आधी से भी कम हुई रूसी सप्लाई

यूक्रेन पर हमले के बाद भारत ने रूस से तेल खरीदना बढ़ा दिया था, जिससे यह अंतर बढ़ गया था। साल 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद भारत, रूसी कच्चे तेल का एक बड़ा खरीदार बन गया था। उस समय पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के कारण रूसी तेल पर भारी छूट मिल रही थी। अपने चरम पर भारत लगभग 20 लाख bpd रूसी कच्चा तेल आयात कर रहा था। लेकिन केप्लर के अनुसार, अगले महीने रूस से तेल की सप्लाई और कम होकर 8 लाख से 10 लाख bpd के बीच रहने का अनुमान है। यह आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब अमेरिका रूस से कच्चे तेल की खरीद कम करने के लिए भारत पर दबाव बना रहा है।

अंतर हुआ काफी कम

हालिया उछाल ने सऊदी अरब और रूस के बीच के अंतर को काफी कम कर दिया है। Kpler के लीड रिसर्च एनालिस्ट सुमित रितोलिया ने कहा, ‘हमें आने वाले हफ्तों में कुछ कमी की उम्मीद है, क्योंकि कुछ शिपमेंट मार्च की शुरुआत में पहुंच सकते हैं। पूरे महीने के हिसाब से हमारा अनुमान है कि फरवरी में सऊदी अरब से आयात औसतन 1 से 1.1 mbd के करीब रहेगा, जो कि कई सालों का उच्च स्तर है।’ उन्होंने बताया कि फरवरी में रूस से कच्चे तेल का आयात 1 से 1.2 mbd रहने की उम्मीद है और अगले महीने यह घटकर 0.8 से 1 mbd प्रतिदिन हो सकता है।

एनालिस्ट के मुताबिक अप्रैल में रूस से आयात में और गिरावट आने की उम्मीद है क्योंकि यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के बाद रूसी कच्चे तेल पर बहुत अधिक निर्भर नायरा की वडोदरा रिफाइनरी अप्रैल-मई में रखरखाव के लिए बंद होने वाली है।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *