सुबह स्कूल, रात को मयखाना

बिलासपुर । सुबह स्कूल, शाम ढलने के बाद देर रात तक मयखाना और अवकाश के दिन चारागाह। जी हां, यह शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का भवन है, जो ऐसी ही गतिविधियों के लिए पहचान बना रहा है।
ज्यादा दूर नहीं, खंड मुख्यालय से महज 4 किलोमीटर की दूरी पर है ग्राम तरेंगा। यहां का विद्यालय भवन, मदिरा प्रेमियों के लिए बेहद सुरक्षित ठिकाना बन रहा है, मदिरा सेवन के लिए। कहने के लिए ग्राम पंचायत नामक शासकीय संस्था काम करती नजर आती है लेकिन पंचायत की नजर से दूर है, ऐसी अवांछित गतिविधियां। लिहाजा खुलकर हो रहा है यह काम।
इसलिए बैखौफ
शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय। अहाता केवल सामने के हिस्से में ही है। शेष तीन हिस्से खुले हुए हैं। इसलिए शाम होते ही मदिरा प्रेमी आ जुटते हैं। करीब ही शराब की दुकान है। इसलिए दूसरी ज़रूरी सामग्री के लिए भटकना नहीं होता। देर रात तक यह गतिविधियां नियमित देखी जा सकती हैं।
अवकाश के दिन इनके हवाले
दूर तक फैला, शाला का खेल मैदान, अवकाश के दिन मवेशी पालकों और घूमंतु मवेशियों के हवाले होता है। यहां ही छोडे जाते हैं मवेशी। जो देर शाम मैदान छोड़ते हैं क्योंकि ‘दूसरा उपभोक्ता’ पहुंचना शुरू कर चुका होता है।
चुप है ग्राम पंचायत
तरेंगा में भी ग्राम पंचायत है। चुने हुए जनप्रतिनिधि हैं। तीन तरफ से अहाताविहीन इस स्कूल को लेकर यह भी मालूम हो कि परिसर का उपयोग रात में कौन लोग करते है ? लेकिन जैसी चुप्पी इसने साधी हुई है, शायद ही कहीं और मिसाल मिलेगी। पूछने पर सरपंच दशरथ आडिल का कहना था- मुझे कुछ नहीं मालूम..। ठेकेदार ही बता पाएगा। जिम्मेदारी स्कूल समय तक की शेष रह जाती है शाला विकास समिति। जैसी गतिविधियां स्कूल परिसर और खेल मैदान में चल रही है उसे देखकर समिति ने कुछ कहा होगा या किया होगा ? नजर नहीं आता। याने स्कूल संचालन की अवधि तक ही अपनी जिम्मेदारी मानती है यह समिति।

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