सेबी लाया ‘लाइफ साइकल फंड’, नियमों में किया बदलाव, अब काम के आधार पर होंगे स्कीमों के नाम

नई दिल्ली: बाजार नियामक सेबी ( SEBI ) ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड स्कीमों की कैटेगरी तय करने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब स्कीमों के नाम उनके काम के आधार पर होंगे, न कि लुभावने वादों पर। सेबी ने ‘लाइफ साइकल फंड्स’ के रूप में रिटायरमेंट प्लानिंग का नया विकल्प दिया है। सॉल्यूशन ओरिएंटेड स्कीम को खत्म कर दिया है। निवेशकों की सुरक्षा और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए डिस्क्लोजर और एक जैसे निवेश (ओवरलैप) नियमों को सख्त कर दिया है।

क्या हैं लाइफ साइकल फंड्स?

सेबी ने गुरुवार को म्यूचुअल फंड की एक नई कैटेगरी ’लाइफ साइकल फंड्स’ की शुरुआत की है। ये ओपन एंडेड फंड होंगे। यानी इनमें कभी भी पैसा निकाला जा सकता है। लेकिन इनकी मैच्योरिटी पहले से तय होगी। ये फंड उन लोगों के लिए बेहतरीन हैं जो किसी खास लक्ष्य (रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई) के लिए निवेश करना चाहते हैं।

इसमें ‘ग्लाइड पाथ’ रणनीति का इस्तेमाल होगा। इसके तहत पैसा अलग-अलग असेट क्लास जैसे इक्विटी (शेयर), डेट, InvITs, कमोडिटी (ETCDS) और गोल्ड-सिल्वर ईटीएफ में लगाया जाएगा। कंपनियां कम से कम 5 साल और ज्यादा से ज्यादा 30 साल के लिए लॉन्च कर सकती हैं।

इंडेक्स और ETF में क्या बदला?

इंडेक्स फंड और ईटीएफ के लिए यह जरूरी है कि उनकी कुल संपत्ति का कम से कम 95% हिस्सा उन्ही शेयरों या इंडेक्स में निवेश किया जाए जिसे वे ट्रैक कर रहे हैं। फंड ऑफ फंड्स (FoFs) को भी 95% संबंधित फंड्स में निवेश करना होगा। 5 साल से कम मैच्योरिटी वाले डेट निवेश के लिए, ‘AA’ या उससे बेहतर रेटिंग वाले साधनों में ही निवेश की अनुमति होगी।

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