तेलंगाना में शाह और खड़गे के ठोकी ताल, केसीआर के लिए आसान नहीं राह 

हैदराबाद । तेलंगाना में साल के अंत में विधानसभा के चुनाव होने हैं। विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक वार-पलटवार का दौर भी जारी है। साथ ही तेलंगाना में जबरदस्त तरीके से राजनीतिक दलों की ओर से अपनी सक्रियता बढ़ा दी है। वर्तमान में तेलंगाना दक्षिण भारत का एक महत्वपूर्ण राज्य है। 2024 चुनाव से पहले यहां का विधानसभा चुनाव एक दिशा देने वाला हो सकता है। तेलंगाना में भारत राष्ट्र समिति जिसका नेतृत्व के चंद्रशेखर राव करते हैं, वे काफी मजबूत है। 2014 से लगातार दो बार उनकी पार्टी चुनाव जीत चुकी है। मजबूती से उनकी सरकार भी चल रही है। हालांकि तेलंगाना में भाजपा और कांग्रेस की ओर से भी दम लगाया जा रहा है। पिछले 2 दिनों की बात करें तब एक ओर जहां कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने तेलंगाना का दौरा किया था। वहीं केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी रविवार को हुंकार भरी थी। 
एक सार्वजनिक रैली को संबोधित करते हुए भाजपा और केसीआर पर जमकर निशाना साधा। खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी और सोनिया गांधी जो वादा करते हैं, वे पूरा करते हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी जनता के लिए काम करना चाहती है…लेकिन बीजेपी कहती है कि कांग्रेस ने पिछले 53 साल में कुछ नहीं किया। उन्होंने कहा कि वे हमसे रिपोर्ट कार्ड दिखाने को कहते हैं। उन्होंने कहा कि आजकल शाह जी पूछ रहे हैं कि कांग्रेस ने 53 साल में क्या किया? खड़गे ने कहा कि कांग्रेस ने आजादी के बाद 562 रियासतों को देश में मिलाया। सरदार पटेल जी ने देश को एक किया। देश को संविधान अंबेडकर जी और कांग्रेस ने दिया। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जैसे ही तेलंगाना में बनेगी हम एससी-एसटी घोषण के 12 पॉइंट को लागू कर दिए जाएंगे। यह हम करके द‍िखाएंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कर्नाटक में 5 वादे क‍िए हैं और हम उन्हें अमल में ला रहे हैं। कांग्रेस जो कहती है, वहां करके द‍िखाती है।
कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि केसीआर की सरकार को उखाड़ फेंकने के ल‍िए आप लोग यहां जुटे हैं। तेलंगाना जनता की वजह से बना, कांग्रेस के नेताओं की वजह से बना… लेक‍िन इसका क्रेड‍िट एक आदमी ले रहा है। क्‍या तब केसीआर के पास इतनी शक्‍त‍ि थी? हमने उन्‍हें शक्‍त‍ि दी, सोन‍िया जी ने उन्‍हें शक्‍ति दी। उन्होंने कहा कि केसीआर और वे (भाजपा) दोस्त बन गए हैं। ये अंदरूनी दोस्ती है, इस बारे में वे खुलकर नहीं बोल सकते। खड़गे ने कहा कि हम 26 पार्टियां केंद्र में पीएम मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार को हटाने के लिए तैयार हैं…लेकिन केसीआर ने कभी किसी बैठक में भाग नहीं लिया और कभी नहीं कहा कि बीजेपी को (केंद्र में) हटाने के लिए हम एक साथ आएंगे…यहां वे (बीआरएस) कहते हैं कि वे (बीआरएस) धर्मनिरपेक्ष हैं लेकिन साथ ही वे उनके (भाजपा) साथ चीजों पर चर्चा कर रहे हैं।
वहीं केंद्रीय मंत्री शाह ने परिवारवादी राजनीति को लेकर कांग्रेस, एआईएमआईएम और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) पर तंज कसते हुए उन्हें क्रमश: 4जी, 3जी और 2जी पार्टी करार दिया। शाह ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के उस आरोप पर पलटवार किया जिसमें उन्होंने कहा है कि तेलंगाना के मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गुप्त सहमति है और वे चुनाव के बाद हाथ मिलाएंगे। शाह ने कहा कि उनकी पार्टी राज्य में बीआरएस के साथ गठबंधन नहीं करेगी। शाह ने कहा कि ‘भ्रष्ट और दमनकारी मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के नेतृत्व वाली बीआरएस सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है, इस असदुद्दीन ओवैसी का समर्थन प्राप्त है। शाह ने कहा, ‘‘कांग्रेस एक 4जी पार्टी है, जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा जी, राजीव जी और अब राहुल गांधी, यह चार पीढ़ियों की पार्टी है। केसीआर की पार्टी 2जी पार्टी है और ओवैसी की पार्टी 3जी पार्टी है।’’ शाह ने कहा, ‘‘ना 2जी आएगा, ना 3जी आएगा और ना ही 4जी आएगा। अब कमल की बारी है।’’
आश्चर्य की बात है कि चुनाव से 4 माह पहले ही तेलंगाना के मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति के अध्यक्ष राव ने 115 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी। बड़ा सवाल यह है कि आखिर केसीआर ने पहले उम्मीदवारों के ऐलान से क्या संदेश देने की कोशिश की है? दावा किया जा रहा है कि केसीआर ने साफ तौर पर यह बताना चाहा है कि वे चुनाव के लिए हमेशा तैयार है। ज्यादातर पुराने उम्मीदवारों को ही टिकट दिया गया है। इसके बाद ये दिखाने की कोशिश की है कि उन्हें उम्मीदवारों को चुनने में कोई कंफ्यूजन नहीं है। केसीआर फिलहाल भाजपा और कांग्रेस से समान दूरी बना कर रहे हैं। वह 2024 चुनाव के लिए एक अलग गठबंधन की कवायत में भी हैं।
तेलंगाना में विधानसभा के 119 सीट हैं। उससे पहले बीआरएस ने 100 सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि जिस तरीके से वर्तमान में विपक्षी दलों की तैयारी है, उससे कहीं ना कहीं तेलंगाना चुनाव भी दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान के अलावा देश की नजर तेलंगाना पर भी रहेगी। 

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