तो अब विदेशी भी पीएंगे ‘महुआ’ और ‘फेनी’ जैसे देसी शराब, जान लीजिए CIABC का प्लान

नई दिल्ली: वह दिन दूर नहीं जबकि महुआ (Mahua) के फूलों से बनी देसी शराब ’ठर्रा’ या ‘महुआ’ और गोवा की देसी शराब ‘फेनी’ (Feni) का भी भर-भर के निर्यात होगा। दरअसल, भारत की शराब बनाने वाली कंपनियों के संगठन CIABC ने सरकार से मांग की है कि ‘महुआ’ और ‘फेनी’ जैसी भारतीय पारंपरिक शराब को दुनिया भर में बढ़ावा दिया जाए। CIABC का कहना है कि ऐसा करने से इस शराब का निर्यात बढ़ेगा और भारतीय ब्रांड अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मुकाबला कर पाएंगे।

टकीला, साके और सोजू को मिलेगी टक्कर

कंफेडरेशन ऑफ इंडियन अल्कोहलिक बीवरेज कंपनीज (CIABC) के चेयरमैन दीपक रॉय ने कहा कि सरकार की मदद से भारतीय पारंपरिक शराब को अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ावा दिया जा सकता है। इनमें भारत और दुनिया भर में बहुत संभावनाएं हैं। वह CIABC द्वारा बुधवार को यहां आयोजित AlcoBev India 2025 में बोल रहे थे। उन्होंने कहा, "भारतीय पारंपरिक शराब में बहुत क्षमता है। जैसे ‘टकीला’ मेक्सिको से, ‘साके’ जापान से और ‘सोजू’ कोरिया से पहचाना जाता है, वैसे ही हम ‘फेनी‘ या ‘महुआ’ को दुनिया में पहचान दिला सकते हैं। हमें पुरानी सोच से बाहर निकलकर भारतीय पारंपरिक शराब को बढ़ावा देना होगा।"

एक समान टैक्स सिस्टम की जरूरत

उन्होंने यह भी कहा कि अलग-अलग राज्यों में टैक्स की दरें अलग-अलग होने से शराब उद्योग को बहुत परेशानी होती है। उन्होंने कहा, "भारतीय शराब उद्योग के लिए कोई एक जैसी रणनीति नहीं है। उद्योग को एक समान टैक्स सिस्टम की जरूरत है, जिससे विकास को बढ़ावा मिलेगा।" CIABC के डायरेक्टर जनरल अनंत एस अय्यर ने कहा कि भारतीय शराब उद्योग टैक्स में सुधार और अच्छी नीतियों की उम्मीद कर रहा है। इससे उद्योग का विकास होगा और सरकार को भी ज्यादा कमाई होगी।

शराब निर्यात में कहां है भारत

शराब निर्यात के मामले में भारत दुनिया में 40वें नंबर पर है। CIABC का लक्ष्य है कि आने वाले सालों में भारत टॉप 10 में शामिल हो जाए। वर्ष 2023-24 में भारत ने 2,200 करोड़ रुपये से ज्यादा की शराब का निर्यात किया था। भारत से शराब यूएई, सिंगापुर, नीदरलैंड, तंजानिया, अंगोला, केन्या और रवांडा जैसे देशों में भेजी जाती है। CIABC चाहता है कि आने वाले सालों में शराब का निर्यात 1 बिलियन डॉलर तक पहुंच जाए।

बहुत आगे जा सकता है उद्याेग

सीआई एबीसी (CIABC) का मानना है कि यदि सरकार साथ दे तो भारतीय शराब उद्योग बहुत आगे जा सकता है। खासकर, जो हमारी पुरानी और पारंपरिक शराब है, उसे दुनिया भर में पहचान मिल सकती है। इससे किसानों को भी फायदा होगा, जो महुआ और फेनी जैसे उत्पादों को बनाते हैं। सरकार को चाहिए कि वह इस दिशा में ध्यान दे और जरूरी कदम उठाए।

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *