भगवान के चरणों में करें नए साल की शुरुआत, यह हैं 5 प्रमुख गणेश मंदिर

अगर आप भी अपने नए साल की शुरुआत मंदिर में करना चाह रहे हैं तो आज हम आपको भगवान गणेश के 5 प्रमुख और प्रसिद्ध मंदिरों के बारे में बताएंगे, जहां दर्शन और पूजा पाठ करके आप अपने नए साल को खास बना सकते हैं. यह पांचों मंदिर मध्य प्रदेश के खरगोन जिले के अलग-अलग शहरों में मौजूद हैं और खास मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध हैं.

सिद्धिविनायक गणेश मंदिर
खरगोन शहर में कुंदा नदी के तट पर श्री सिद्धि विनायक गणेश मंदिर स्थित है. यह मंदिर लगभग 300 वर्ष पुराना है. मंदिर में रखी एक पत्थर से बनी गणेश जी की प्रतिमा का निर्माण नागा साधुओं द्वारा किया गया था. जब मूर्ति को बैलगाड़ी से महाराष्ट्र ले जा रहे थे तब किले की घाटी चढ़ नहीं पाए और मूर्ति की स्थापना यहीं करनी पड़ी थी.

श्री षष्टानंद सिद्धेश्वर गजानंद मंदिर
खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 59 KM दूर ग्राम चोली गांव में श्री षष्टानंद सिद्धेश्वर गजानंद मंदिर मौजूद है. पांडव कालीन इस मंदिर में विराजित भगवान गणेश की नृत्य मुद्रा में छः भुजाओं के साथ साढ़े ग्यारह फिट ऊंची प्रतिमा है, यह मूर्ति एक पाषाण (पत्थर की शिला) पर बनी है. नृत्य मुद्रा में पाषाण से निर्मित भगवान गणेश की यह प्रतिमा पूरे देश में इकलौती बताई जाती है.

श्री चिंतामण गणेश मंदिर
खरगोन जिला मुख्यालय से करीब 58 KM दूर पवित्र नगरी महेश्वर में पेशवा मार्ग पर श्री चिंतामण गणेश मंदिर मौजूद है. यहां भगवान गणेश अपनी दोनो पत्नियां, रिद्धी सिद्धि के साथ विराजमान है. यह मंदिर होलकर कालीन होकर 1700 ईसवी में देवी अहिल्या बाई होलकर द्वारा इस मंदिर का निर्माण करवाया गया था. यहां उल्टा स्वास्तिक बनाने की मान्यता है.

गोबर गणेश मंदिर
महेश्वर में गोबर गणेश मंदिर भी मौजूद है. मंदिर में विराजित गणेश जी की प्रतिमा गोबर से निर्मित है. यह मंदिर लगभग 900 साल पुराना बताया जाता है. 250 साल पहले अहिल्या बाई होलकर ने मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था. माना जाता है की गोबर में मां लक्ष्मी का वास होता है. इसलिए यहां धन की कामना लिए दूर दूर से भक्त दर्शन के लिए आते है.

उच्छिष्ट महा गणेश मंदिर
यह मंदिर जिला मुख्यालय से लगभग 70 KM दूर सनावद में ओंकारेश्वर रोड़ पर स्थित है. बताया जाता है उच्छिष्ट महा गणेश के मंदिर भारत में कम ही है. इस मंदिर में गणेश जी के दर्शन केवल महीने में चतुर्थी के दिन ही होते हैं. बाकी दिन मंदिर का पट बंद रहता है. मान्यता है कि मंदिर में गुड़, पान या मोदक खाकर भगवान के दर्शन करने से मनवांछित फल मिलता है.
 

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