तंबाकू-सिगरेट पर एक्साइज से राज्यों को भी होगा फायदा, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया पूरा प्लान

नई दिल्ली: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को लोकसभा में कहा कि सरकार ने कोई नया सेस नहीं लगाया है, बल्कि तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई नया कानून नहीं है और न ही केंद्र सरकार कोई अतिरिक्त टैक्स लगा रही है। उन्होंने कहा कि तंबाकू उत्पादों पर लगाई गई एक्साइज ड्यूटी को राज्यों के साथ शेयर किया जाएगा। वित्त मंत्री ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार हमेशा राज्यों के हितों का ध्यान रखती है और किसी भी राज्य को फाइनेंस कमीशन द्वारा तय की गई राशि से कम संसाधन नहीं मिलते हैं।

सीतारमण ने सेंट्रल एक्साइज (अमेंडमेंट) बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही। उन्होंने कहा, "कई सांसदों ने कहा कि यह एक सेस है। यह सेस नहीं है, यह एक्साइज ड्यूटी है। एक्साइज ड्यूटी जीएसटी से पहले भी थी। यह राशि फाइनेंस कमीशन की सिफारिशों के अनुसार राज्यों को बांटी जाएगी। यह सुनिश्चित करने के लिए कि एक्साइज लगा रहा है ताकि कंपनसेशन सेस की भरपाई हो सके।" लोकसभा ने इस बिल को ध्वनि मत से पारित कर दिया।

आरोपों को किया खारिज

वित्त मंत्री ने इस आरोप को खारिज कर दिया कि केंद्र सरकार जीएसटी कंपनसेशन सेस के पैसे का इस्तेमाल अपना कर्ज चुकाने के लिए कर रही है। सीतारमण ने कहा, "यह कई बार स्पष्ट किया गया है कि कंपनसेशन सेस पांच साल की अवधि के लिए राज्यों को देने के उद्देश्य से एकत्र किया गया था, और पांच साल बाद यह समाप्त होना था। वास्तव में, कंपनसेशन सेस जीएसटी काउंसिल के अधिकार के साथ इसलिए एकत्र किया गया था ताकि कोविड-19 महामारी के दौरान राज्यों को हुए राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए लिए गए लोन को चुकाया जा सके।"सेंट्रल एक्साइज एक्ट में संशोधन करके केंद्र सरकार ने विभिन्न श्रेणियों की सिगरेट के प्रति 1,000 स्टिक पर 2,700 रुपये से 11,000 रुपये तक एक्साइज ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। बिल में तंबाकू के विभिन्न उपयोगों के लिए प्रति किलोग्राम 60%-70% और चबाने वाले तंबाकू पर प्रति किलोग्राम 100% की लेवी का भी प्रस्ताव है। उन्होंने बताया कि जीएसटी से पहले तंबाकू पर टैक्स की दरें हर साल बढ़ाई जाती थीं ताकि इसके उपयोग को हतोत्साहित किया जा सके।

आठ साल से नहीं बदला रेट

सीतारमण ने WHO के हवाले से कहा कि पिछले दशक में भारत में सिगरेट की अफोर्डिबिलिटी स्थिर रही है या बढ़ी है। उन्होंने कहा कि 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद से सिगरेट पर सेस की दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। फरवरी से पान मसाला के सभी पैकेटों पर खुदरा बिक्री मूल्य (RSP) और अन्य अनिवार्य घोषणाएं डिस्प्ले करनी होंगी।

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