इजरायल-अमेरिका पर सख्ती, भारत के लिए नरमी, जयशंकर से ईरानी विदेश मंत्री की बात क्यों है खास, एक्सपर्ट ने बताया

तेहरान: अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच ईरान और भारत के विदेश मंत्रियों के बीच फोन पर बात हुई है। ईरानी विदेश मंत्रालय ने एक्स पर पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। इसमें बताया कि भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी ईरानी समकक्ष अब्बास अराघची से इलाके के डेवलपमेंट पर चर्चा की। बातचीत के दौरान ईरानी विदेश मंत्री ने पिछले 11 दिनों में अमेरिका और इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमलों के बारे में विस्तार से बताया।

उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि होर्मुज स्ट्रेट के जरिए शिपिंग की असुरक्षित स्थिति के लिए अमेरिका की आक्रामक कार्रवाइयों का नतीजा है और इसके लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका को जिम्मेदार ठहराना चाहिए। ईरानी विदेश मंत्री ने अमेरिका और इजरायल के हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के बुनियादी सिद्धांतों का उल्लंघन बताया है। इस दौरान भारतीय विदेश मंत्री ने नई दिल्ली और तेहरान के बीच बातचीत और द्विपक्षीय रिश्तों को मजबूत करने की अहमियत पर जोर दिया

भारत के लिए ईरान की नरमी

ईरानी विदेश मंत्रालय की भाषा बेहद खास है। इसमें जहां इजरायल और अमेरिका के लिए बेहद की सख्त रुख अपनाया गया है, वहीं भारत पर यह टोन बिल्कुल बदल जाती है। इसमें भारत की चुप्पी को लेकर कोई शिकायत नहीं है। पूर्व विदेश सचिव निरूपमा मेनन रॉय इसे बहुत खास बताती हैं। उन्होंने एक्स पर लिखा कि ईरान साफ तौर पर समझता है कि भारत एक नाजुक स्थिति में है

ईरान ने छोड़ रखा खुला दरवाजा

निरूपमा मेनन रॉय लिखती है कि तेहरान समझता है कि भारत को सबके सामने नाराज करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बजाय ईरान ज्यादा महीन काम कर रहा है। वह भारत को टेंट के अंदर रख रहा है। लगातार बातचीत और दो-तरफा रिश्तों पर जो देर ईरान संकेत दे रहा है कि वह अब भी भारत को बातचीत के लायक मानता है। इसे वह शायद दूसरे एक्टर्स के लिए एक संभावित डिप्लोमैटिक पुल के तौर पर देखता है। रॉय ने इसे दरवाजा खुला छोड़ने वाली नीति बताया।

ईरान ने छोड़ रखा खुला दरवाजा

निरूपमा मेनन रॉय लिखती है कि तेहरान समझता है कि भारत को सबके सामने नाराज करने से कुछ हासिल नहीं होगा। इसके बजाय ईरान ज्यादा महीन काम कर रहा है। वह भारत को टेंट के अंदर रख रहा है। लगातार बातचीत और दो-तरफा रिश्तों पर जो देर ईरान संकेत दे रहा है कि वह अब भी भारत को बातचीत के लायक मानता है। इसे वह शायद दूसरे एक्टर्स के लिए एक संभावित डिप्लोमैटिक पुल के तौर पर देखता है। रॉय ने इसे दरवाजा खुला छोड़ने वाली नीति बताया।

ईरान के लिए भारत है खास

निरूपमा रॉय ने आगे कहा, दूसरे शब्दों में तेहरान कह रहा है, हम जानते हैं कि आप वह नहीं कह सकते जो हम चाहते हैं कि आप कहें, लेकिन हम आपको किसी कोने में नहीं धकेलने वाले हैं। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि ईरान अब भी भारत को ऐसे देश के तौर पर देखता है, जिसकी रणनीतिक उलझन दुश्मनी के बजाय काम की है। उन्होंने भारत जैसी बड़ी क्षेत्रीय ताकत को तेहरान से जोड़े रखने को छोटी डिप्लोमैटिक जीत बताया है।

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