टैरिफ ने किया अमेरिका का बेड़ा गर्क…! इस भारतवंशी महिला ने कर दी ट्रंप की खिंचाई, भारत के लिए कही यह बात

नई दिल्ली: अमेरिकी कांग्रेस की भारतीय मूल की सदस्य प्रमिला जयपाल ने राष्ट्रपति ट्रंप के भारत पर लगाए गए टैरिफ की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि इन शुल्कों से न केवल अमेरिकी लोगों के लिए चीजें महंगी हो रही हैं, बल्कि भारत को अन्य वैश्विक शक्तियों के करीब भी धकेला जा रहा है।

जयपाल ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘ट्रंप के भारत पर लगाए गए टैरिफ सिर्फ अमेरिकियों के लिए कीमतें नहीं बढ़ा रहे हैं- वे भारत को एक व्यापारिक सहयोगी के रूप में हमसे दूर कर रहे हैं और देश को रूस और चीन के साथ साझेदारी करने के लिए अधिक प्रोत्साहन दे रहे हैं। इससे हमारी अर्थव्यवस्था को नुकसान होता है और हम सभी के लिए कम सुरक्षित हो जाते हैं।’ अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी का भारी टैरिफ लगाया हुआ है


पड़ोसी देशों पर कम टैरिफ

एक संसदीय सुनवाई के दौरान जयपाल ने एक्सपर्ट विटनेस समीर लालवानी से इन टैरिफ के प्रभाव के बारे में सवाल पूछे। उन्होंने पूछा कि भारत को कैसा महसूस हो सकता है जब उसके पड़ोसी देश, पाकिस्तान और बांग्लादेश, भारत की तुलना में कम टैरिफ दरें हासिल कर चुके हैं।

उन्होंने कहा कि अगस्त में राष्ट्रपति ट्रंप ने कई भारतीय सामानों पर टैरिफ को दोगुना करके 50% कर दिया। क्या भारत इस बात को लेकर चिंतित है कि उसके पड़ोसी, पाकिस्तान और बांग्लादेश, भारत की तुलना में कम टैरिफ दरें हासिल कर चुके हैं, जबकि भारत सक्रिय रूप से बातचीत कर रहा है? और इस धारणा से कि अमेरिका अब एक विश्वसनीय भागीदार नहीं है, भारत के ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन के साथ संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है?

भारत पर क्या असर?

लालवानी ने जवाब दिया कि ये टैरिफ भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय हैं। उन्होंने कहा कि इससे निर्यात की संभावनाएं सीमित हो रही हैं और लागत बढ़ रही है। उन्होंने चेतावनी दी कि ये उपाय भारत को BRICS और शंघाई सहयोग संगठन के करीब धकेल सकते हैं, जो टैरिफ के इच्छित लक्ष्यों के विपरीत है।

अमेरिका को निर्यात कम

अगस्त से ट्रंप की व्यापार नीति ने भारत से आयात होने वाली वस्तुओं पर शुल्क बढ़ा दिया है। इनमें कपड़े, रत्न, चमड़ा और समुद्री भोजन शामिल हैं और कुछ मामलों में यह शुल्क 50% तक पहुंच गया है। भारतीय अधिकारियों और उद्योग समूहों का कहना है कि ये ऊंचे टैरिफ अमेरिका को भारत के निर्यात को काफी कम कर सकते हैं। अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। इससे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में नौकरियों पर खतरा मंडरा रहा है।

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