सोनभद्र खदान हादसे में मरने वालों की संख्या 7 हुई, परिजनों को 20 लाख की मदद का एलान, DM पर 10 हजार का जुर्माना

सोनभद्र: उत्तर प्रदेश के पत्थर खदान हादसा चर्चा का विषय बना हुआ है। बिल्ली मारकुंडी खदान हादसे में सोमवार को मलबे से छह और मजदूरों के शव बरामद किए गए। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर सात हो गई है। जिलाधिकारी बीएन सिंह के मुताबिक 16 और 17 नवंबर की मध्यरात्रि से लेकर सोमवार दोपहर तक जिन पांच शवों को निकाला गया, उनकी पहचान इंद्रजीत (30), संतोष (30), रवींद्र (18), राम खेलावन (32) और कृपाशंकर के रूप में हुई है। इससे पहले रविवार को राजू सिंह (30) का शव मिला था।

शनिवार शाम ओबरा थाना क्षेत्र के बिल्ली मारकुंडी खनन क्षेत्र में पहाड़ी का एक हिस्सा अचानक गिरने से खदान धंस गई थी। हादसे के वक्त कई मजदूर नीचे काम कर रहे थे, जो मलबे में दब गए। पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने बताया कि ‘कृष्णा माइनिंग वर्क्स’ की खदान में हुई इस घटना के बाद खदान मालिक समेत तीन लोगों पर मुकदमा दर्ज किया गया है, उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें बनाई गई हैं।

तीन स्तर पर लोगों खदान हादसे की जांच

एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत-बचाव कार्य में लगी हुई हैं। इस बीच, प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री और जनपद के प्रभारी मंत्री रवीन्द्र जायसवाल सोमवार को सोनभद्र पहुंचे। मुर्दाघर पर उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की और कहा कि हादसे की त्रिस्तरीय जांच कराई जाएगी।

20 लाख की सहायता

उन्होंने बताया कि जांच पुलिस, खनन विभाग और जिला प्रशासन तीन स्तरों पर होगी। अगर इसमें अवैध खनन या मानकों की अनदेखी सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। मंत्री जायसवाल ने कहा कि सरकार मृतकों के परिजनों को लगभग 20 लाख रुपये की आर्थिक सहायता विभिन्न मदों से देगी।

एनजीटी ने डीएम पर 10 हजार का लगाया जुर्माना

राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने सोनभद्र के जिलाधिकारी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई अवैध खनन के खिलाफ रिपोर्ट समय पर नहीं देने पर की गई है। एनजीटी की पीठ, जिसमें चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य ए. सेंथिल वेल शामिल थे, ने आदेश में बताया कि अप्रैल में एक संयुक्त कमेटी बनाई गई थी।

इस कमेटी में जिलाधिकारी को नोडल एजेंसी बनाया गया था, जबकि पर्यावरण मंत्रालय के लखनऊ क्षेत्रीय कार्यालय, सीपीसीबी और यूपीपीसीबी के प्रतिनिधि भी शामिल थे। कमेटी को मौके पर जाकर अवैध खनन की स्थिति जांचने, नदी के बीचों-बीच खनन (मिडस्ट्रीम माइनिंग) के आरोपों की सच्चाई परखने और जरूरी पर्यावरण मंजूरी की स्थिति का पता लगाकर 23 जून तक रिपोर्ट देने को कहा गया था। (सोर्स-पीटीआई)

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