राजस्थान में फिर तेज हो सकता है गुर्जर समाज का आंदोलन, शहीद दिवस से पहले जानिए क्या है समिति की मांग

हिंडौन सिटी: राजस्थान में एक बार फिर गुर्जर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हो गई है। रविवार को हिंडौन सिटी स्थित स्वर्गीय कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के निवास पर ‘गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति’ की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के पदाधिकारियों ने सरकार की कार्यप्रणाली पर गहरा रोष व्यक्त करते हुए दो-टूक कहा कि यदि उनकी लंबित मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आगामी 23 मई (शहीद दिवस) को बड़ी रणनीति का ऐलान किया जाएगा।

समझौते के 10 महीने बाद भी अधूरी हैं उम्मीदें

संघर्ष समिति के अध्यक्ष विजय बैंसला ने बैठक के बाद बताया कि पिछले साल 8 जून को सरकार के साथ जो समझौता हुआ था, वह ठंडे बस्ते में नजर आ रहा है। हालांकि, सरकार ने शहीद रूपनारायण के परिजन को अनुकंपा नियुक्ति देकर एक मांग पूरी की, लेकिन बाकी अहम मुद्दे पिछले 10 महीनों से लंबित हैं।

मुकदमों की वापसी पर फंसा पेंच

समिति का सबसे बड़ा आरोप मुकदमों की वापसी को लेकर है। पदाधिकारियों के अनुसार, 2023 से मार्च 2026 तक एक भी मुकदमे का निस्तारण नहीं हुआ है। नवंबर 2023 में सरकार ने दावा किया था कि 42 केस खत्म कर दिए गए हैं, लेकिन गृह विभाग ने आज तक उन मुकदमों के एफआईआर नंबर समाज के साथ साझा नहीं किए। समाज का मानना है कि कागजों में निस्तारण दिखाकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है।

इन मुद्दों पर भी सुलग रही है चिंगारी

बैठक में कई अन्य गंभीर विषयों पर भी चर्चा हुई जिसने समाज के आक्रोश को बढ़ा दिया है:

  • RJS बैकलॉग: हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद राजस्थान न्यायिक सेवा (RJS) में बैकलॉग का क्रियान्वयन नहीं हुआ है।
  • संपत्ति कुर्की का डर: करौली के एक पुराने मामले (2008/2016) में समाज के लोगों की संपत्ति कुर्की के आदेश हुए थे। डेढ़ साल से जानकारी देने के बाद भी सरकार ने इस मामले में कोई राहत नहीं दी।
  • TSP क्षेत्र में आरक्षण: लंबे समय से चली आ रही मांग को दोहराते हुए टीएसपी (TSP) क्षेत्र में भी एमबीसी (MBC) आरक्षण लागू करने की बात कही गई।
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