होर्मुज नाकाबंदी: दुनिया की सबसे शक्तिशाली नेवी का प्लान, कैसे मुकाबले करेगा ईरान, कौन कितना ताकतवर?

वॉशिंगटन: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की फ्री आवाजाही शुरू कराने के लिए एक प्लान बनाया है। ये प्लान है- होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकेबंदी करना। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल के हमला शुरू करने के बाद इस अहम ऊर्जा जलमार्ग को चोक कर दिया था। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की नेवी ने यहां अपना कंट्रोल बनाए रखा है और गुजरने वाले जहाजों को 20 लाख डॉलर का भारी टोल देना पड़ रहा है। तमाम दबावों के बावजूद अमेरिका इस रास्ते को खुलवा नहीं पाया है।

ईरान ने बंद कर रखा है होर्मुज स्ट्रेट

ईरान ने कहा है कि उसकी मांगें पूरी होने तक वह इस अहम रास्ते को नहीं खोलेगा। इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता के दौरान भी इस मुद्दे पर आखिर तक गतिरोध बना रहा। आखिरकार वार्ता बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।

इस्लामाबाद वार्ता के टूटते ही ट्रंप ने कहा कि वे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में घुसने या उससे बाहर निकलने वाले किसी भी जहाज को नहीं गुजरने देंगे। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक बयान जारी कर बताया कि नाकाबंदी को 13 अप्रैल से लागू किया जा रहा है। साथ ही यह भी बताया कि यह केवल उन समुद्री जहाजों पर लागू होगी जो ईरान के बंदरगाहों में आ-जा रहे हैं।

ईरान का ट्रंप पर पलटवार

वहीं, ईरान ने पहले की तरह इस बार भी पीछे हटने से इनकार किया है। तेहरान ने कहा है कि होर्मुज पर उसका कब्जा है और जहाजों को टोल देना ही होगा। ईरानी नेवी ने जहाजों को एक नए रास्ते से गुजरने की सलाह दी है, जो उसकी समुद्री सीमा के अंदर से होकर जाता है। ईरान ने कहा है कि बाकी क्षेत्रों में उसने समुद्री बारूदी सुरंगे लगाई हैं, जो जहाजों के लिए खतरा बन सकती हैं।

ईरान के इस नए रास्ते को तेहरान टोल बूथ कहा जा रहा है। अमेरिका का कहना है कि ईरान इस रास्ते से आने-जाने वाले जहाजों से टोल वसूल रहा है। युद्धविराम के बाद अब तक एक दर्जन से भी कम व्यापारिक जहाज इस नए रास्ते से गुजरे हैं। हालांकि, यह नहीं साफ है कि क्या इनसे कोई टोल वसूला गया है।

अमेरिकी सेना कैसे नाकाबंदी को कैसे लागू करेगी?

  • अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों में आने-जाने वाले जहाजों को रोकने के लिए सेना लानी होगी।
  • इसके साथ ही उसे अंतरराष्ट्रीय शिपिंग रूट से बारूदी सुरंगों को नष्ट करना होगा।
  • 12 अप्रैल को सेंट्रल कमांड ने बताया कि बारूदी सुरंगों को हटाने के लिए उसके दो युद्धपोत जलडमरूमध्य से गुजरे। इसने कहा कि वह और भी यूनिट्स भेजेगा।
  • अरब सागर में अमेरिकी नेवी के पास USS अब्राहम लिंकन कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और USS टू जिमा एम्फीबियस रेडी ग्रुप मौजूद है।

ईरान कैसे करेगा मुकाबला?

  • ईरान के पास 20 गदीर-क्लास की छोटी पनडुब्बियों का एक बेड़ा है, जिसे उत्तर कोरिया के डिजाइन के आधार पर देश में ही तैयार किया है।
  • इस पनडुब्बी का वजन 125 टन है, जिसमें 7 सदस्यों का चालक दल होता है। यह दो 533mm के टारपीडो ले जा सकती है।
  • ईरान के पास जहाज-रोधी बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन भी हैं। लेकिन उसके पास फारस की खाड़ी से दूर समुद्र में चलने वाले जहाजों की कोई क्षमता नहीं है।
  • ईरान के अधिकांश नौसैनिक जहाज अमेरिका ने युद्ध की शुरुआत में डुबो दिए थे। वहीं, उसका मुकाबला दुनिया की सबसे शक्तिशाली अमेरिकी नेवी से होना है।
  • ऐसे में वह यही कर सकता है कि ज्यादा से ज्यादा जलडमरूमद्य के करीब अमेरिकी नेवी को निशाना बनाए। यही अमेरिकी सेना के लिए सबसे बड़ी मुश्किल भी है, क्योंकि होर्मुज को खोलने के लिए अमेरिकी नेवी को पास जाना होगा।
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